मायावती ने फिर आकाश आनंद से छीनी बड़ी जिम्मेदारी, नेशनल को-ऑर्डिनेटर पद भी गया; बोलीं- अभी और राजनीतिक परिपक्वता की जरूरत
UP News: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव सामने आया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को फिलहाल संगठन की किसी बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है। उन्हें पार्टी में कार्यकर्ता के तौर पर काम करने की अनुमति रहेगी, लेकिन फिलहाल कोई अहम पद नहीं दिया जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आकाश से नेशनल को-ऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी वापस ले ली गई है।
मायावती ने अपने फैसले के पीछे बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला दिया। उनका कहना है कि कांशीराम परिवार के सदस्यों को पार्टी के काम से जुड़ने की अनुमति देते थे, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या संगठन में महत्वपूर्ण पद देने के पक्ष में नहीं थे।
मायावती बोलीं- आकाश को अभी और सीखने की जरूरत
मायावती के मुताबिक आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है। उनका तर्क है कि राजनीतिक परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझना जरूरी है, ताकि विरोधी दल साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर बसपा को चुनावी नुकसान न पहुंचा सकें।
आकाश को पार्टी से बाहर नहीं किया गया है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट से नेशनल को-ऑर्डिनेटर का पद हटाकर खुद को केवल बसपा कार्यकर्ता बताया है। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि फिलहाल उनकी भूमिका संगठन के भीतर सीमित रहेगी।
पहले भी कई बार बदली आकाश की भूमिका
आकाश आनंद की पार्टी में जिम्मेदारी का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2019 में उन्हें बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी के लिए कई जनसभाएं कीं और आक्रामक अंदाज में चुनाव प्रचार किया।
मई 2024 में सीतापुर की एक जनसभा में दिए गए भाषण के बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद मायावती ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया था। हालांकि कुछ समय बाद उनकी वापसी हो गई।
इसके बाद मार्च 2025 में एक बार फिर आकाश को बसपा से निष्कासित किया गया। उस समय मायावती ने यह भी कहा था कि उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। बाद में आकाश की दोबारा पार्टी में वापसी हुई और अगस्त 2025 में उन्हें राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी फिर सौंप दी गई।
हाल में हाथरस में चुनावी रैली के दौरान आकाश आनंद ने भाजपा पर तीखा हमला बोला था। अब एक बार फिर संगठन की बड़ी जिम्मेदारी उनसे वापस ले ली गई है।
आरएसएस पर भी मायावती का हमला
लखनऊ में हुई बसपा की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में मायावती ने आरएसएस को भी निशाने पर लिया। उन्होंने जातिवाद, सामाजिक असमानता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए आरएसएस की कथनी और करनी में अंतर होने का आरोप लगाया।
मायावती ने आरएसएस से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के समतामूलक संविधान को ईमानदारी से लागू करने की बात कही।
संगठन मजबूत करने पर फोकस
बैठक में मायावती ने पार्टी संगठन को और मजबूत करने और उसकी कमियों को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने पदाधिकारियों से पूरी निष्ठा के साथ काम करने को कहा। साथ ही कांशीराम की पुण्यतिथि पर देशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए।
मायावती ने कहा कि बहुजन आंदोलन का मूल उद्देश्य शोषित और वंचित वर्ग को सत्ता में भागीदारी दिलाना है। उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सत्ता तक पहुंच को जरूरी बताया।
आकाश आनंद को एक बार फिर बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी से दूर किए जाने के बाद बसपा के भीतर उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। आने वाले समय में पार्टी उन्हें किस तरह की जिम्मेदारी देती है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।







