यूपी में मेडिकल कॉलेज 41 से बढ़कर 85 हुए, MBBS सीटें भी 13,600 पार; लोहिया संस्थान के स्थापना दिवस पर बोले CM योगी
UP News: उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बीते वर्षों में हुए विस्तार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के स्थापना दिवस समारोह में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ी है और मेडिकल शिक्षा के लिए सीटों में भी बड़ा इजाफा हुआ है। मुख्यमंत्री ने लोहिया संस्थान के सफर का जिक्र करते हुए कहा कि कभी सीमित सुविधाओं वाला अस्पताल आज स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो चुका है।
41 से बढ़कर 85 हुए मेडिकल कॉलेज
सीएम योगी ने बताया कि पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर 41 मेडिकल कॉलेज संचालित थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 85 हो गई है। प्रदेश में इस समय दो एम्स भी संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने मेडिकल शिक्षा में बढ़ी सीटों का आंकड़ा भी साझा किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, पहले प्रदेश में MBBS की कुल 4,690 सीटें थीं, जो अब बढ़कर 13,600 से अधिक हो गई हैं। वहीं PG सीटों की संख्या 3,564 से बढ़कर 5,067 हो चुकी है।
नर्सिंग शिक्षा का भी हुआ विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। प्रदेश में 2017 से पहले जहां केवल 2 नर्सिंग कॉलेज थे, वहीं अब 33 नर्सिंग कॉलेज संचालित हैं और 33 अन्य निर्माणाधीन हैं।
योगी ने इसे प्रदेश के हेल्थ स्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण कड़ी बताया और कहा कि डॉक्टरों के साथ पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ तैयार करना भी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
‘पहले केंद्र से 17 मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर एम्स की मिली थी मंजूरी’
मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि 2017 से पहले वह गोरखपुर से सांसद थे और उस समय उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत को लेकर आवाज उठाते थे।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सामने मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के शुरुआती दौर में उत्तर प्रदेश के लिए 17 मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर में एम्स को मंजूरी मिली थी।
योगी ने आरोप लगाया कि उस समय की राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेजों के निर्माण को लेकर अपेक्षित सहयोग नहीं किया। उन्होंने गोरखपुर एम्स के लिए ऐसी जमीन दिए जाने का भी आरोप लगाया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट की रोक थी।
‘अब इलाज के लिए पैसे से ज्यादा चिंता वेटिंग लिस्ट की’
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सरकारी योजनाओं के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले गरीब मरीजों के सामने इलाज के खर्च की बड़ी चुनौती होती थी, लेकिन अब आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री राहत कोष के जरिए भी मरीजों को उपचार के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाती है।
योगी ने कहा कि आज सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलाज के लिए पैसे की नहीं, बल्कि वेटिंग लिस्ट को कम करने की है। उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में लोहिया संस्थान के काम की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने इस दिशा में तेजी से प्रगति की है।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर CM योगी का जोर
मुख्यमंत्री ने संस्थानों में नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, उसका परिणाम उतना ही बेहतर होगा।
योगी के मुताबिक चयन में किसी तरह की गड़बड़ी, भेदभाव या पारदर्शिता की कमी का असर लंबे समय तक पूरे संस्थान पर पड़ता है। एक व्यक्ति की गलती की कीमत पूरे संस्थान को चुकानी पड़ सकती है और इससे संस्थान की प्रतिष्ठा पर भी सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले किसी एक व्यक्ति के गलत कृत्य का खामियाजा पूरे प्रदेश को भुगतना पड़ता था।
20 बेड के अस्पताल से बड़े संस्थान तक का सफर
लोहिया संस्थान के विकास का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में सरकार के सामने यह सवाल था कि मौजूदा अस्पताल आगे चलकर सिर्फ अस्पताल रहेगा या इसे एक पूर्ण संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।
उस समय संस्थान में आने वाले कर्मचारियों और अन्य लोगों को लेकर भी असमंजस की स्थिति थी। बाद में तय किया गया कि जो लोग संस्थान में काम करना चाहते हैं, उन्हें यहां अवसर दिया जाएगा और अन्य इच्छुक कर्मचारियों को उनकी पसंद के अनुसार स्थानांतरित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस संस्थान की शुरुआत कभी 20 बेड के छोटे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में हुई थी, उसके इतने तेजी से विस्तार की कल्पना शायद उस समय नहीं की जा सकती थी। आज यह उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को जमीन पर उतारने में भूमिका निभा रहा है।
‘संस्थान को अब अपनी अगली यात्रा के लिए तैयार होना होगा’
स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने संस्थान को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से लगातार खुद को विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से संस्थान की आवश्यकताओं को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।
अब संस्थान की जिम्मेदारी है कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करे, अपनी क्षमता बढ़ाए और आने वाले वर्षों में चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल करे।







