उत्तर भारत को मिली बड़ी कनेक्टिविटी, दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का भव्य उद्घाटन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया लोकार्पण, अब सिर्फ ढाई घंटे में पूरा होगा सफर
- लगभग 213 किमी लंबा छह-लेन एक्सप्रेसवे तैयार हुआ है.
- पुराना समय लगभग 6 घंटे था — नए एक्सप्रेसवे से अब ढाई घंटे में सफर पूरा होगा.
- परियोजना की लागत करीब ₹12,000 करोड़ रुपये है.
- सड़क राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड होते हुए देहरादून तक जाती है.
Delhi-Dehradun Expressway Inaugurated by PM Narendra Modi: इंतजार खत्म हुआ. बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का पीएम नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को उद्घाटन कर दिया. इसी के साथ दोनों शहरों के बीच 6 घंटे का सफर अब सिर्फ ढाई घंटे का रह गया है. इस एक्सप्रेसवे से दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों को दिल्ली से देहरादून आने-जाने में काफी सहूलियत होगी.

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है. इस प्रोजेक्ट का बहुत बड़ी हिस्सा यूपी से गुजरता है. इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे.

राजमार्ग-एक्सप्रेसवे देश की भाग्य-रेखाएं हैं
पीएम मोदी ने कहा कि जो लोग भविष्य बताने वाले होते हैं, वे हथेली की रेखाओं को पढ़कर किसी व्यक्ति का भविष्य बताते हैं. लेकिन अगर मैं इस बात को, इस संदर्भ को देश के जीवन से जोड़ूं, तो देश की भाग्य-रेखा क्या है? ये हैं हमारी सड़कें, हमारे राजमार्ग, हमारे एक्सप्रेसवे, हमारे हवाई मार्ग, हमारे रेल मार्ग और हमारे जल मार्ग. यही हमारे देश की भाग्य-रेखाएं हैं, और पिछले एक दशक से, हमारा देश एक विकसित भारत बनाने के लिए विकास की ऐसी ही भाग्य-रेखाएं गढ़ने में जुटा हुआ है.
पीएम ने कहा कि 12000 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में हजारों श्रमिकों को काम मिला. इंजीनियर और अन्य लोगों को भी रोजगार मिला. इससे उत्तराखंड के पर्यटन को काफी फायदा होगा. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के तमाम पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए यह एक्सप्रेसवे मुख्य मार्ग के तौर पर इस्तेमाल में आएगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा प्रमुख पर्यटन और आर्थिक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाकर, साथ ही पूरे क्षेत्र में व्यापार और विकास के नए रास्ते खोलकर, क्षेत्रीय आर्थिक विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा परियोजना के कार्यान्वयन में 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवर ब्रिज (ROB), चार बड़े पुल और 12 रास्ते में पड़ने वाली सुविधाओं का निर्माण भी शामिल है, ताकि निर्बाध और उच्च गति की कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके. यात्रियों को सुरक्षित और अधिक कुशल यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए, यह गलियारा एक उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (ATMS) से सुसज्जित है.
इस क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता, समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों को ध्यान में रखते हुए, इस गलियारे को कई ऐसी विशेषताओं के साथ डिज़ाइन किया गया है, जिनका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष को काफी हद तक कम करना है.
जंगली जानवरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए, इस परियोजना में वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़ी कई विशेष विशेषताएं शामिल की गई हैं. इनमें 12 किलोमीटर लंबा 'वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर' (ऊंचा गलियारा) शामिल है, जो एशिया के सबसे लंबे गलियारों में से एक है. इस गलियारे में आठ 'एनिमल पासेस' (जानवरों के लिए रास्ते), 200-200 मीटर के दो 'हाथी अंडरपास', और मां डाट काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी एक सुरंग भी शामिल है.







