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सुप्रीम कोर्ट की दो टूक- न्यायपालिका को कोई डरा नहीं सकता! राहुल गांधी-अखिलेश यादव को नोटिस

SIR विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका को कोई डरा नहीं सकता. इस मामले में राहुल गांधी और अखिलेश यादव को नोटिस जारी किए जाने की खबर है. अदालत की टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है.

 
UP POLITICS

National: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को अहम सुनवाई की। इस दौरान प्रधान न्यायाधीश ने विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के मुद्दे पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका को डराकर या दबाव बनाकर प्रभावित नहीं किया जा सकता। वहीं, SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर दाखिल याचिका पर राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत विपक्ष के अन्य नेताओं से जवाब मांगा गया है।

न्यायपालिका को कोई डरा नहीं सकता', SIR पर SC की सख्त टिप्पणी, राहुल-अखिलेश  को नोटिस

इस मामले में चुनाव आयोग और उसके शीर्ष अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया गया है। याचिका में मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

राहुल गांधी-अखिलेश यादव समेत 13 नेताओं की याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में 12 अक्टूबर को दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी से जवाब मांगा गया। याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत समेत 13 विपक्षी नेता शामिल हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल हैं। विपक्षी नेताओं ने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होने की जांच की मांग की है।

‘न्यायपालिका को डराकर दबाव में नहीं ला सकते’

सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का मुद्दा उठाया। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को धमकाकर या दबाव बनाकर प्रभावित नहीं किया जा सकता।

SIR को लेकर विपक्षी दलों के विरोध और राजनीतिक बयानबाजी के बीच अदालत की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, अदालत की टिप्पणी और याचिका पर जारी नोटिस को अलग-अलग प्रक्रियात्मक पहलुओं के रूप में देखा जाना चाहिए।

एक याचिकाकर्ता के व्यवहार पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई में संबंधित याचिकाकर्ता से उसके व्यवहार के बारे में सवाल किया जाएगा। इससे संकेत मिलता है कि अदालत ने मामले के कानूनी पहलुओं के साथ-साथ सुनवाई के दौरान हुए आचरण को भी गंभीरता से लिया है।

SIR को लेकर विपक्ष ने क्या मांग रखी?

विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उसे उचित सूचना और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। इसके अलावा याचिका में निम्नलिखित मांगें भी रखी गई हैं:

  • मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बूथवार सूची सार्वजनिक की जाए।

  • नाम हटाने के कारण और संबंधित विवरण उपलब्ध कराए जाएं।

  • SIR प्रक्रिया में अपनाई जा रही व्यवस्था की संवैधानिक वैधता की जांच हो।

  • चुनाव आयोग के फैसलों को संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानून और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के अनुरूप परखा जाए।

अब चुनाव आयोग के जवाब पर नजर

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों के जवाब पर नजर रहेगी। इस मामले का आगे का घटनाक्रम SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची में संशोधन और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों के लिहाज से अहम हो सकता है। अदालत में उठे मुद्दों पर अंतिम निर्णय सुनवाई और उपलब्ध कानूनी तथ्यों के आधार पर होगा।