उत्तर-पश्चिमी भारत तपेगा आग की तरह, IMD का अलर्ट- अगले 7 दिन तक लू से राहत नहीं, लोगों को सतर्क रहने की सलाह...
Heatwave Tightens Grip Across India: देश के दो तिहाई हिस्सों में भीषण गर्मी से लोगों का हाल-बेहाल है. वहीं मौसम विभाग ने हीटवेव को बड़ी चेतावनी दी है. शनिवार 25 अप्रैल को विभाग ने बताया कि, लोगों को फिलहाल गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली है. आईएमडी का कहना है कि, लोगों को अप्रैल के महीने में सामान्य से ज्यादा तापमान में रहने से बचने के लिए जरूरी बचाव के कदम उठाने चाहिए.

मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से लेकर 44 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा. सबसे ज्यादा तापमान राजस्थान के श्री गंगानगर में 44.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसके अलावा, कई इलाकों में तापमान साल के इस समय के औसत तापमान से 5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक है. ये सब मिलकर चल रही हीटवेव और नागरिक स्वास्थ्य और जलवायु उतार-चढ़ाव को लेकर और चिंता का संकेत देते हैं. आखिर में, डेटा देश की राजधानी दिल्ली में ट्रेंड दिखा रहा है.
अप्रैल 2020 से 2023 के दौरान शहर में सबसे ज़्यादा रिकॉर्ड किया गया तापमान इस तरह है:
2020 में 38 डिग्री सेल्सियस से लेकर 40 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. 2021 में 42 डिग्री सेल्सियस से लेकर 44 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. वहीं, 2023 में दिल्ली का तापमान 45 डिग्री से लेकर 47 सेल्सियस रहा, जबकि मार्च 2022 में भारत में आई खतरनाक हीटवेव के दौरान तापमान रिकॉर्ड किया गया था. इस साल, अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा तापमान पूरे साल के सबसे ज्यादा तापमान के मुकाबले मौसम में बहुत पहले ही रिकॉर्ड किया जा रहा है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बदलाव जलवायु परिवर्तन में बड़े बदलाव का संकेत देता है. काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की एक शोध में पाया गया कि भारत के लगभग 57 फीसदी जिलों में हीटवेव का बहुत ज्याद जोखिम है, जिससे देश की लगभग 76 प्रतिशत आबादी पर असर पड़ रहा है.
पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. हिश्मी जमील हुसैन ने इस ट्रेंड को बहुत चिंताजनक बताया. उन्होंने ईटीवी भारत को बताया, "अप्रैल का तापमान चिंता की बात बनता जा रहा है. पहले के लगभग 40 डिग्री सेल्सियस के पीक हाई से 2026 में 44 डिग्री तक, हम सिर्फ उतार-चढ़ाव नहीं देख रहे हैं, बल्कि जलवायु आधार रेखा में बदलाव देख रहे हैं. इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि ये तापमान अब 2022 की हीटवेव का चरम स्तर जैसा दिख रहा है, लेकिन मौसम में पहले आ रहा है."
उन्होंने आगे कहा कि हीटवेव अब सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी चिंता नहीं है, बल्कि एक बहु-आयामी संकट है. हुसैन ने कहा, "यह सिर्फ पर्यावरण मुद्दा नहीं है. यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक और शहरी लचीलापन से जुड़ी चुनौती है. हीटवेव शायद बाढ़ या भूकंप की तरह हेडलाइन में न आएं, फिर भी वे चुपचाप लोगों को बैचेन कर रहा है. बढ़ता तापमान उत्पादकता पर असर डाल रही हैं, हेल्थकेयर सिस्टम पर दबाव डाल रही हैं और सबसे ज्यादा कमजोर लोगों को प्रभावित कर रही हैं."
मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि आने वाले दिनों में जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में हीटवेव की स्थिति बनने की बहुत संभावना है. इस बीच, तटीय और पूर्वी इलाकों में गर्मी और नमी की स्थिति रहने की उम्मीद है, जिससे परेशानी और बढ़ जाएगी.
एक नई चिंता 'गर्म रातें' का लगातार होना है. खासकर उत्तरी मैदानी इलाकों में स्थिति चिंताजनक है. यहां रात में गर्म तापमान सूरज डूबने के बाद ठंडक की क्षमता को कम कर देता है, जिससे गर्मी से जुड़ी बीमारियां बढ़ जाती हैं. क्योंकि यह दिन की गर्मी से उबरने में रुकावट डालता है.

मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि उत्तर-पश्चिम भारत में 27 अप्रैल तक अधिकतम तापमान स्थिर रहेगा, इसके बाद इस तारीख के बाद धीरे-धीरे गिरावट आएगी, जबकि बाकी भारत में अनुमान के मुकाबले धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने का अनुमान है.
आईएमडी ने कई सुरक्षा चेतावनियां और सुझाव भी जारी किए हैं, जिसमें लोगों को दोपहर में सीधे धूप में कम निकलने का सुझाव दिया गया है. इसके अलावा, यह सलाह दी जाती है कि लोग पर्याप्त मात्रा में पानी या तरल पदार्थ का सेवन करते रहें. हल्के और हवादार कपड़े पहनें और जब तापमान ज्यादा हो तो बाहर ज्यादा मेहनत वाली शारीरिक गतिविधियां कम करें.
खासकर बच्चों और बुजुर्गों (खासकर मेडिकल कंडीशन) के लिए भीषण गर्मी से बचने की सलाह दी गई है. उन्हें इस मौसम में उनका खास ख्याल रखने का सुझाव दिया गया है. आईएमडी ने अपनी एडवाइजरी में जोर दिया है कि, गर्मी से होने वाली बीमारियों जैसे गर्मी से थकावट और हीट स्ट्रोक को कम करने के लिए जल्दी जागरूकता और बचाव के उपाय बहुत जरूरी हैं.
लंबे अनुमान से पता चलता है कि अगले सात दिनों तक कई इलाकों में हीटवेव की स्थिति बनी रहने की संभावना है. भारत के उत्तर-पश्चिमी इलाके में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश आते हैं, जबकि मध्य भारत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ आते हैं. भारत के दूसरे दक्षिणी इलाकों, खासकर केरल और माहे में भी ज्यादा तापमान रहेगा.
तटीय राज्यों में गर्म और नमी वाला मौसम बना रहेग. उदाहरण के लिए ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश, जहां नमी वाला गर्मी की स्थिति बनी रहेगी. इन इलाकों में गर्म रातें ज्यादा देर तक रहेंगी, जिससे सभी इलाकों में गर्मी का तनाव बढ़ेगा.
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि भारत के पूर्वी, मध्य और उत्तर-पश्चिमी इलाकों और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीप में हीटवेव के दिन औसत से ज्यादा होंगे. हीटवेव से शहरी इलाकों में बढ़ते खतरे से निपटने के लिए कई स्तर पर सहयोग की जरूरत है. शहरी नियोजन में गर्मी रोकने वाले मकानों में ज्यादा हरियाली और परावर्तक निर्माण सामग्री शामिल होने चाहिए.







