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अब कूड़ा नहीं होगा बेकार, इसी से दौड़ेंगी गाड़ियां! यूपी में बड़ा प्रोजेक्ट

उत्तर प्रदेश के एक शहर में कचरे के बेहतर इस्तेमाल और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 50 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है. इस परियोजना के तहत शहर में जमा होने वाले कचरे से वाहन ईंधन तैयार किया जाएगा. इससे कचरे के निस्तारण की समस्या कम करने के साथ वैकल्पिक ईंधन उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
 
UP

Bareilly:  उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में अब कचरे को समस्या नहीं, बल्कि ऊर्जा के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है। घरों, होटलों, रेस्टोरेंट, सब्जी मंडियों और डेयरियों से निकलने वाले जैविक कचरे से वाहन ईंधन तैयार किया जाएगा। इसके लिए सथरापुर में करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित करने की योजना है।

प्रस्तावित प्लांट में प्रतिदिन लगभग 200 मीट्रिक टन जैविक कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा। इससे तैयार होने वाली गैस को शुद्ध कर सीएनजी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस परियोजना से शहर में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के साथ ग्रीन एनर्जी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

छह एकड़ जमीन पर बनेगा आधुनिक प्लांट

इस परियोजना को इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की ओर से पूरा किया जाएगा। कंपनी सथरापुर में करीब छह एकड़ जमीन पर प्लांट स्थापित करेगी। इसके लिए नगर निगम और इंडियन ऑयल के बीच समझौते की प्रक्रिया चल रही है।

नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के मुताबिक, अगले दो महीने में दोनों पक्षों के बीच करार पूरा होने की उम्मीद है। समझौता होने के बाद प्लांट के निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

घरों से लेकर मंडियों तक के कचरे का होगा इस्तेमाल

प्रस्तावित प्लांट में रोजाना करीब 200 टन जैविक कचरे को संसाधित करने की क्षमता होगी। इसके लिए शहर के अलग-अलग स्रोतों से गीला और जैविक कचरा जुटाया जाएगा। इसमें घरों से निकलने वाला गीला कचरा, होटल और रेस्टोरेंट का अपशिष्ट, सब्जी मंडियों से निकलने वाली जैविक सामग्री और डेयरियों का गोबर शामिल होगा।

इस कचरे को वैज्ञानिक तकनीक से संसाधित कर बायोगैस में बदला जाएगा। इससे शहर में जैविक कचरे के निस्तारण की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।

सीएनजी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होगी गैस

प्लांट में तैयार बायोगैस को शुद्ध करने के बाद कंप्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी में बदला जाएगा। इसमें से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य अशुद्धियां हटाई जाएंगी। निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरने वाली गैस का इस्तेमाल कार, ऑटो और बसों में ईंधन के रूप में किया जा सकेगा।

इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों में भी सीबीजी के उपयोग की संभावनाएं हैं। इससे पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

नगर निगम की आय बढ़ाने की भी योजना

इस परियोजना से बरेली नगर निगम को आर्थिक फायदा मिलने का भी प्रस्ताव है। प्लांट में तैयार सीबीजी की बिक्री से होने वाली आमदनी में नगर निगम की हिस्सेदारी तय करने की योजना है। हालांकि, निगम को कितनी राशि मिलेगी और राजस्व का बंटवारा किस अनुपात में होगा, यह अंतिम समझौते की शर्तें तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

गैस के साथ तैयार होगी जैविक खाद

इस परियोजना की एक और खासियत यह है कि कचरे से सिर्फ गैस ही नहीं, बल्कि जैविक खाद भी तैयार की जा सकेगी। बायोगैस उत्पादन की प्रक्रिया के बाद बचने वाले जैविक अवशेष का इस्तेमाल खाद बनाने में किया जाएगा। इस तरह कचरे का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के साथ कृषि कार्यों में भी हो सकेगा।

स्वच्छ बरेली और ग्रीन एनर्जी की दिशा में पहल

CBG प्लांट शुरू होने के बाद बरेली में गीले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे खुले में कचरा जमा होने की समस्या कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल नगर निगम और इंडियन ऑयल के बीच समझौते की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। करार के बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ेगा। यदि योजना तय समय पर धरातल पर उतरती है, तो बरेली में कचरे से ईंधन बनाने की यह परियोजना स्वच्छता और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।