रक्षाबंधन पर बहन ने पेश की मिसाल, भाई की जिंदगी के लिए दे दी अपनी किडनी..ये दो कहानियां आपको भावनाओं के सागर में डूबो देगी
Inspirational Real Storyof Two Siblings: भाई-बहन का रिश्ता दुनिया मे सबसे खास और अनमोल माना जाता है. रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार, विश्वास और स्नेह का प्रतीक है। जब भाई पर कोई मुसीबत आती है तो बहन ढाल बनकर खड़ी हो जाती है. ऐसा ही दो दिल छू लेने वाला मामला इस खास मौके पर लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड से भाई-बहन के रिश्ते की एक भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है और एक मामला ग्रेटर नोएडा से सामने आया है, जहा रक्षाबंधन के त्योहार से ठीक पहले एक बहन ने अपने बीमार भाई को अपनी किडनी देकर नया जीवन दान दिया है. यहां एक बहन ने अपने भाई की जिंदगी बचाने के लिए अपनी एक किडनी दान कर दी। बहन के इस त्याग से भाई को नया जीवन मिला। भाई आज भी अपनी बहन के इस एहसान को जीवनभर न चुका पाने की बात कहता है।

कुड़ू निवासी शिवानंद प्रसाद की शादी वर्ष 2000 में ऊषा साहू से हुई थी। ऊषा साहू के एक भाई और दो बहनें हैं। वर्ष 2016 में उनके भाई रोहित साहू की तबीयत बिगड़ने पर जांच में किडनी फेल होने की जानकारी सामने आई।
भाई की जिंदगी बचाने के लिए बहन ने लिया बड़ा फैसला
रोहित साहू की स्थिति गंभीर होने पर रांची रिम्स के चिकित्सकों ने परिजनों को दिल्ली एम्स ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिवार रोहित को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल लेकर पहुंचा। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि रोहित की किडनी फेल हो चुकी है और जल्द ट्रांसप्लांट नहीं होने पर उसकी जान बचाना मुश्किल हो सकता है।
परिजनों ने रोहित के लिए किडनी की काफी तलाश की, लेकिन कहीं से भी मदद नहीं मिल सकी। इसी दौरान उनकी बहन ऊषा साहू ने भाई के लिए अपनी एक किडनी दान करने का फैसला किया। उन्होंने अपने पति शिवानंद प्रसाद से इस बारे में बात की।
पति ने भी दिया पूरा साथ
ऊषा के पति शिवानंद प्रसाद ने पत्नी की भाई के प्रति त्याग की भावना को समझते हुए उनके फैसले का विरोध नहीं किया। इसके बाद ऊषा अपने पति के साथ 10 मई 2016 को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल पहुंचीं और चिकित्सकों के सामने भाई को किडनी दान करने की इच्छा जताई।
आवश्यक चिकित्सकीय जांच के बाद 16 मई 2016 को ऊषा साहू ने अपने भाई रोहित साहू को अपनी एक किडनी दान की। इस प्रत्यारोपण के बाद रोहित को नया जीवन मिला और भाई-बहन के रिश्ते की यह कहानी परिवार और क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई।
बहन बोली- भाई के लिए कुछ भी करने को तैयार
ऊषा साहू ने बताया कि चार भाई-बहनों में रोहित उनका इकलौता भाई है। उन्होंने कहा कि भाई के लिए किडनी दान करने का फैसला उनके लिए किसी त्याग से ज्यादा अपने रिश्ते का फर्ज था। भाई को स्वस्थ देखकर उन्हें खुशी मिलती है।
भाई बोला- जिंदगी भर नहीं चुका पाऊंगा एहसान
रोहित साहू आज भी अपनी बहन के इस त्याग को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि आज वह जो जीवन जी रहे हैं, उसमें उनकी बहन ऊषा का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि बहन ने जो किया, उसका एहसान वह जीवनभर नहीं चुका सकते।
रक्षाबंधन के अवसर पर सामने आई यह कहानी बताती है कि भाई-बहन का रिश्ता केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय एक-दूसरे के लिए खड़े होने और जीवनभर साथ निभाने का नाम भी है।
जब भाई पर कोई मुसीबत आती है तो बहन ढाल बनकर खड़ी हो जाती है. ऐसा ही एक दिल छू लेने वाला मामला
दूसरा मामला
दर्द मे था भाई, बहन से देखा नही गया
40 साल के जितेंद्र सिंह गंगवार पिछले दो साल से भी ज्यादा समय से क्रोनिक किडनी की गंभीर बिमारी से जूझ रहे थे. उनकी हालत इतनी खराब थी कि उन्हे हफ्ते मे तीन बार डायलिसिस के दर्दनाक दौर से गुजरना पड़ता था. हर बार जब भाई डायलिसिस के लिए जाता, तो उसकी 45 साल की बड़ी बहन बीना कुमारी गंगवार का कलेजा फट जाता था.

भाई की गिरती सेहत और तकलीफ को देखकर बीना ने एक ऐसा साहसी फैसला लिया, जिसकी मिसाल आज हर कोई दे रहा है. बीना ने बिना किसी झिझक के अपनी दाहिनी किडनी अपने छोटे भाई को डोनेट करने का मन बना लिया.
डॉक्टरों ने की सफल सर्जरी
ग्रेटर नोएडा के शारदाकेयर हेल्थसिटी अस्पताल मे डॉक्टरों की टीम ने पूरी जांच पड़ताल की. जांच मे डोनर और रिसीवर का ब्लड ग्रुप मैच हो गया, जिससे ऑर्गन रिजेक्शन का खतरा काफी कम था. इसके बाद अस्पताल के यूरोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट डायरेक्टर डॉ. अनिल शर्मा और उनकी टीम ने यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्बक पूरी की. अब भाई और बहन दोनो पूरी तरह स्वस्थ है और तेजी से रिकवर कर रहे है.
डॉक्टरों ने कहा - यह रिश्ते की सबसे बड़ी मिसाल
अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि यह केवल एक सफल मेडिकल सर्जरी नही है, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्यार और त्याग का सबसे बड़ा सुबूत है. डॉ. अनिल शर्मा और डॉ. अहमद कमाल ने बताया कि परिवार के लिए यह बहुत भावुक पल था. सही समय पर जांच और बेहतर देखभाल की वजह से यह ट्रांसप्लांट पूरी तरह कामयाब रहा. नेफ्रोलॉजी डायरेक्टर डॉ. कुनाल राज गांधी ने भी कहा कि बहन की हिम्मत और त्याग की वजह से ही जितेंद्र को डायलिसिस के नरक से छुटकारा मिल सका.
बहन बोली - यह कोई त्याग नही, मेरा फर्ज था
अपनी किडनी देकर भाई की जान बचाने वाली बीना कुमारी ने बेहद भावुक होकर कहा कि जब मैने अपने छोटे भाई को हर हफ्ते डायलिसिस के दर्द से तड़पते देखा, तो मुझसे रहा नही गया. अपनी किडनी देना मुझे कोई बड़ा त्याग नही लगा, यह तो एक बहन के रूप मे मेरा प्यार और जिम्मेदारी थी. रक्षाबंधन पर भगवान ने मुझे यह मौका दिया कि मै अपने भाई को स्वस्थ जिंदगी का तोहफा दे सकी, इससे बड़ी खुशी मेरे लिए कुछ नही है.
भाई की आंखो मे छलके आंसू
नया जीवन पाने के बाद भावुक जितेंद्र ने अपनी बहन का शुक्रिया अदा करते हुए कहा:
मेरी बहन हमेशा से मेरे लिए एक मजबूत सहारा बनकर खड़ी रही है. इस रक्षाबंधन पर उसने मुझे अपनी किडनी देकर नई जिंदगी का सबसे कीमती उपहार दिया है. उसके इस अहसान को चुकाने के लिए मेरे पास शब्द कम पड़ रहे हैं.

सच्चे प्यार और समर्पण की मिसाल
यह मामला साबित करता है कि जब किसी रिश्ते मे सच्चा प्यार और इंसानियत जुड़ जाती है, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी आसान हो जाती है. रक्षाबंधन से पहले बीना कुमारी का यह कदम समाज के लिए एक सच्ची प्रेरणा बन गया है.







