नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें पूजन विधि, मंत्र, उपाय और आरती
14 अक्टूबर को नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा का विधान बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां की मंद मुस्कान से ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी. इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी माना जाता है. मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं और उनका वाहन सिंह है. इन्हें अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस देवी की विधि-विधान से आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और भक्तों को मानसिक शांति मिलती है
मां कूष्मांडा की सात भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा सुशोभित हैं. आठवें हाथ में जपमाला है, जिसे सभी सिद्धियों और मनोकामनाओं की पूर्ति का प्रतीक माना जाता है. संस्कृत में कूष्मांड का अर्थ कुम्हड़ा भी होता है. इसी वजह से कुम्हड़ा मां को प्रिय माना जाता है. ज्योतिषीय में मां कूष्मांडा का संबंध बुध ग्रह से जोड़ा जाता है.
नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करते समय हरे रंग के वस्त्र पहन सकते हैं. इसके बाद देवी को धूप, दीप, कुमकुम, चंदन आदि अर्पित करें. पूजा में मां को हरी इलायची, सौंफ या कुम्हड़ा (कद्दू) भी अर्पित किया जाता है. पूजा स्थल पर हल्की सुगंध और घंटी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग बहुत प्रिय है. देवी को इसका भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में जरूर बांटें. पूजा के बाद बाद मां के मंत्र 'ॐ कूष्मांडा देव्यै नमः' का 108 बार जाप करें. इस दिन सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करना भी शुभ होता है.
या देवी सर्वभूतेषु कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
कुष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी माँ भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
माँ के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो माँ संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥







