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कभी हटाई गईं, अब फिर बनीं सिस्टम की ताकत..सुपरकॉप दमयंती सेन को शुभेंदु अधिकारी ने दी नई ताकत...

West Bengal: राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शुभेंदु अधिकारी लगातार ऐसे अधिकारियों और चेहरों को आगे लाने की कोशिश कर रहे हैं, जो कभी ममता सरकार से जुड़े रहे लेकिन बाद में किनारे कर दिए गए. इसी कड़ी में दमयंती सेन का नाम फिर सुर्खियों में आया है. बीजेपी समर्थक खेमे में इसे प्रशासनिक अनुभव और सख्त छवि वाले चेहरे की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है.
 
WEST BENGAL IPS DAMYANTI SEN

West Bengal: पश्चिम बंगाल की चर्चित आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गई हैं. कभी ममता बनर्जी सरकार में अहम जिम्मेदारियां संभालने वाली दमयंती सेन को बाद के वर्षों में प्रशासनिक तौर पर साइडलाइन कर दिया गया था. अब विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा उन्हें लेकर दिए गए बयान और बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने उनकी वापसी की चर्चाओं को तेज कर दिया है.

दमयंती सेन को बंगाल पुलिस की तेजतर्रार और सख्त अधिकारियों में गिना जाता रहा है. उन्होंने कोलकाता पुलिस और राज्य पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया था. कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में उनकी कार्यशैली को लेकर उन्हें “सुपरकॉप” की छवि मिली थी. हालांकि समय के साथ उनका प्रभाव कम होता गया और उन्हें प्रमुख भूमिकाओं से दूर कर दिया गया.

दमयंती सेन... जिस सुपरकॉप को ममता सरकार ने किया साइडलाइन, शुभेंदु लाए पावर  में - Bengal Park Street rape fame ips damyanti sen appointed member  secretary women crime commission ntc drmt - AajTak

दमयंती सेन को शुभेंदु सरकार ने एक विशेष आयोग में नियुक्त किया है. ये आयोग महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की जांच के लिए बनाया है. सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद इस नियुक्ति का ऐलान किया. 

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि आईपीएस दमयंती सेन को उस जांच आयोग का 'मेंबर सेक्रेटरी' नियुक्त किया गया है, जो टीएमसी के 15 साल के शासनकाल के दौरान महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अत्याचारों की जांच करेगा. ये आयोग अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और बच्चों के साथ हुए अपराधों की जांच करेगा. 

कौन हैं आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन?

बता दें कि साल 1996 बैच की आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन कोलकाता पुलिस की पहली महिला ज्वाइंट कमिश्नर (क्राइम) थीं. 6 फरवरी 2012 को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में एक नाइट क्लब से निकली महिला के साथ चलती कार में सामूहिक बलात्कार हुआ था.  तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को उनकी नई सरकार को बदनाम करने के लिए रचा गया एक 'सजायनो घटना' (मनगढ़ंत कहानी) करार दिया था. 

IPS Damayanti Sen back in Kolkata Police after 7 years

सच का साथ देने पर हुआ था तबादला

दमयंती सेन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच की और कुछ ही दिनों में आरोपियों को दबोच लिया. पुलिस जांच ने साबित कर दिया कि बलात्कार की घटना सच थी, जो सरकार के राजनीतिक दावों के बिल्कुल उलट था. केस सुलझने के तुरंत बाद ही दमयंती सेन का तबादला लालबाजार क्राइम ब्रांच से बैरकपुर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज कर दिया गया था. सरकार ने इसे रूटीन ट्रांसफर बताया था, लेकिन विपक्ष और आलोचकों का मानना था कि सरकार के रुख के खिलाफ जाकर सच सामने लाने की वजह से उन्हें सजा दी गई. इसके बाद टीएमसी के पूरे कार्यकाल में उन्हें किसी बड़े की जिम्मेदारी नहीं दी गई. 

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हाईकोर्ट ने जताया था भरोसा

प्रशासनिक हलकों में दमयंती सेन की ईमानदारी हमेशा चर्चा में रही. साल 2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने न्यायपालिका का भरोसा जताते हुए उन्हें राज्य के चार बलात्कार मामलों और चर्चित रसिका जैन मौत मामले की जांच सौंपी थी. इसके बाद 2023 में उन्हें एडीजी (ट्रेनिंग) बनाया गया था.