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ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर तीखा तंज, बोले– हाईकोर्ट ने कसके रगड़ा था, याद आया?

Lucknow:  उन्होंने लिखा, ‘सुप्रभात अखिलेश जी, कैसे हैं? उम्मीद ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि हमेशा की तरह आप बेखबर, मस्त और बिना काम के व्यस्त होंगे.’ आज 6 जून है, सोचा आपको याद दिला दूं। आज ही के दिन 2013 में आपकी सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक प्रश्न पूछकर कसके रगड़ा था। याद आया... ?
 
BIHAR

Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है. सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है. राजभर ने सार्वजनिक मंच से कहा कि “हाईकोर्ट ने आपको कसके रगड़ा था, क्या वो याद है?” इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई है.

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ओपी राजभर के इस बयान को अखिलेश यादव से उनकी पुरानी राजनीतिक खटास से जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल, सपा और सुभासपा के बीच गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर पहले भी कई बार तल्खी सामने आ चुकी है. राजभर कई मौकों पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि समाजवादी पार्टी ने पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों के हितों को गंभीरता से नहीं लिया.

खासकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर तो इसमें काफी एक्टिव दिख रहे हैं. वह रोज समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कुछ ना कुछ जुबानी हमले कर रहे हैं. शनिवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ. उन्‍होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की पोस्ट करते हुए अखिलेश पर बेहद तीखा हमला बोला. राजभर ने अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए उनकी सरकार के दौरान लिए गए एक विवादित फैसले की याद दिलाई, जिस पर हाईकोर्ट ने भी सवाल उठाए थे.

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दरअसल, ओपी राजभर ने अपनी पोस्ट की शुरुआत व्यंग्यात्मक अंदाज में की. उन्होंने लिखा, ‘सुप्रभात अखिलेश जी, कैसे हैं? उम्मीद ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि हमेशा की तरह आप बेखबर, मस्त और बिना काम के व्यस्त होंगे.’ इसके बाद उन्होंने 6 जून 2013 का जिक्र करते हुए कहा कि इसी दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार से एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा था. राजभर ने दावा किया कि अदालत ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में आरोपियों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने के फैसले पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया था.

2013 के मामले का दिलाया हवाला

राजभर ने एक पुरानी खबर का स्क्रीनशॉट भी इसमें साझा किया. इसमें उल्लेख था कि 2007 के लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद बम धमाकों के आरोपियों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने के सपा सरकार के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था. अदालत ने सरकार से आरोपियों की सूची मांगी थी और इस फैसले पर सवाल उठाए थे. राजभर ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर अखिलेश यादव पर हमला बोला और कहा कि उन्हें अपने पुराने फैसलों को याद करना चाहिए. उन्होंने लिखा कि इससे उन्हें अपने पाप याद आ जाएंगे और 2027 के विधानसभा चुनाव में हार होने पर EVM या अन्य कारणों को दोष देने का मौका नहीं मिलेगा.


ओपी राजभर ने अपनी पोस्ट में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जो लोग सपा नेतृत्व का समर्थन करते हैं, उन्हें यह जानना चाहिए कि अतीत में उनकी सरकार ने कौन-कौन से फैसले लिए थे. इसी कारण उन्होंने अपनी बात हिंदी में भी लिखने की बात कही. पोस्ट के अंत में राजभर ने सपा का गढ़, आतंकवाद की जड़ वाला राजनीतिक नारा भी दोहराया. यह नारा लंबे समय से भाजपा और उसके सहयोगी दलों द्वारा समाजवादी पार्टी पर हमले के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.

बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन प्रदेश में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है. एनडीए के सहयोगी दलों के नेता लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर हमलावर हैं, जबकि विपक्ष भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है. ऐसे में आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.