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कभी बाज नहीं आएगा पाकिस्तान, अब मासूम बच्चों से करवा रहा भारत में जासूसी...

Pathankot: पठानकोट में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा भारतीय बच्चों को 'मोहरा' बनाकर देश की सुरक्षा में सेंध लगाने की नापाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है. पठानकोट पुलिस ने जम्मू के सांबा जिले के रहने वाले एक 15 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया है, जो पिछले करीब एक साल से ISI के सीधे संपर्क में था...
 
INDIA-PAKISTAN

Pathankot: पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. वह लगातार भारत को नुकसान पहुंचाने और उसके खिलाफ जासूसी करवाने के तमाम हथकडे अपनाता रहता है. इसी सिलसिले में अब पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने भारत के मासूमों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. ऐसा ही एक मामला पठानकोट में सामने आया है.

ताजा जानकारी के मुताबिक पठानकोट पुलिस ने एक 15 साल के नाबालिग को गिरफ्तार किया जो पिछले एक साल से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) के संपर्क में था और खुफिया जानकारी भेज रहा था. पुलिस को उसके मोबाइल से गोपनीय दस्तावेज मिले हैं.

जम्मू के सांबा जिले का रहने वाला है नाबालिग
अभी तक जो जानकारी मिली उसके अनुसार यह नाबालिग जम्मू के सांबा जिले का रहने वाला बताया जा रहा है. पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है. वहीं, पुलिस की पूछताछ में मालूम चला है कि पंजाब के कई दूसरे जिलों में भी नाबालिग बच्चे ISI के संपर्क में हैं. इस वजह से पुलिस ने सभी जिलों को अलर्ट जारी कर दिया है.

गोपनीय जानकारी मिलने के बाद किया गया गिरफ्तार
इस मामले पर पठानकोट के एसएसपी (SSP) दलजिंदर सिंह ढिल्लों ने बताया कि पुलिस को सूत्रों से जानकारी पता चला है कि एक नाबालिग पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी ISI के फ्रंटल टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन के कॉन्टैक्ट में है. वह उन्हें देश की सुरक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारी भेज रहा था. यह नाबालिग पाकिस्तानी आर्मी, ISI अधिकारियों और टेररिस्ट मॉड्यूल से जुड़े लोगों के कॉन्टैक्ट में था. इसी जानकारी के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया है.

सिर्फ 15 साल की उम्र में लालच
पठानकोट एसएसपी (SSP) ने कहा कि नाबालिग से पूछताछ की जा रही है. उसके पास से मिले मोबाइल फोन की जांच की गई. गोपनीय दस्तावेज देखकर हमलोग हैरान हो गए. नाबालिग सिर्फ 15 साल का है. पाकिस्तानी एजेंसियां ​​सोशल मीडिया के जरिए बच्चों को फंसाती हैं. बच्चों को इसकी गंभीरता का पता नहीं होता. पाकिस्तानी एजेंसियां ​​पहले उनसे बात करती हैं, फिर उनसे बात करती हैं. इसके बाद उन्हें हथियारों की ट्रेनिंग और सप्लाई के जाल में फंसाती हैं.

पाकिस्तानी एजेंसियों और आतंकवादी मॉड्यूल के जाल में फंसा
दलजिंदर सिंह ढिल्लों ने कहा कि पाकिस्तानी एजेंसियां ​​बच्चों से उनकी परेशानियों के बारे में भी जानकारी निकालती हैं. इस बच्चे के पिता की डेढ़ साल पहले मौत हो गई थी. बच्चे को शक था कि उसके पिता की हत्या हुई है. बच्चे का घर जम्मू-कश्मीर में है. हमने जांच की, लेकिन उसके पिता की हत्या नहीं हुई थी, बल्कि बच्चे को इस बात पर यकीन था. इसके लिए उसने कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सर्च किए. इस तरह वह पाकिस्तानी एजेंसियों और उनके टेररिस्ट मॉड्यूल के जाल में फंस गया.

ISI ने फोन क्लोनिंग के जरिए मोबाइल फोन से जानकारी हासिल की
उसके पास से मिले मोबाइल फोन से पता चला कि वह मोबाइल टेक्नोलॉजी का अच्छा जानकार था. पाकिस्तानी एजेंसियों ने फोन क्लोनिंग के जरिए उसके फोन से पूरी जानकारी हासिल करना शुरू कर दिया था. उसने अपने मोबाइल फोन पर कई जरूरी जगहों के वीडियो रिकॉर्ड कर रखे थे. अगर उसका फोन हैक हो जाता, तो वह वहां से लाइव ब्रॉडकास्ट कर सकता था.

पाकिस्तानी गैंगस्टरों से संपर्क
इसके अलावा, वह टेरर मॉड्यूल से जुड़े पाकिस्तानी गैंगस्टर्स के संपर्क में भी आया. वह बातचीत करता रहा. पाकिस्तानी एजेंसियों को भी ऐसे लोगों की जरूरत है जो उनकी चाल में फंस सकें. उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है. इसी तरह, पाकिस्तानी एजेंसियाँ पाकिस्तान बॉर्डर से लगे गांवों में युवा पीढ़ी को जासूसी के लिए बहला रही हैं. इस तरह से और भी कई बच्चे फंसे हैं. हमने सीनियर अधिकारियों और बॉर्डर जिलों के SSP को इस बारे में जानकारी दी है.