पीएम मोदी ने गैरकानूनी काम किया, शिकायत करूंगी; राष्ट्र के नाम संबोधन पर ममता बनर्जी
Newshaat Desk: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर रविवार को जमकर निशाना साधा। उन्होंने पीएम मोदी पर सरकारी मशीनरी का राजनीतिक प्रचार के लिए दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। हुगली जिले के तारकेश्वर में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के आरक्षण बिल पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के जरिए भाजपा के लिए गैरकानूनी प्रचार किया। कल उन्होंने सरकारी मशीनरी का राजनीतिक प्रचार के लिए दुरुपयोग किया। हम इसकी निंदा करते हैं और चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराएंगे।'
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री पर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया। शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में पीएम मोदी ने लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले बिल को 2029 से लागू करने संबंधी विधेयक के पास न होने पर बात की। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत की महिलाएं भ्रूण हत्या के पाप के लिए उन्हें कड़ी सजा देंगी। इस पर ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए, 'आपको भारत की जनता को जवाब देना होगा कि आप अपनी पार्टी के लिए अवैध प्रचार कर रहे हैं।'
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल सितंबर 2023 में ही पास हो चुका था। उन्होंने पूछा कि केंद्र सरकार ने इसे अभी तक लागू क्यों नहीं किया। ममता बनर्जी ने पूछा कि एक ही बिल को कितनी बार पास करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में पेश करते समय परिसीमन बिल से जोड़ दिया। ममता बनर्जी ने कहा, 'भाजपा के पास पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद उन्होंने लोकसभा में बिल लाने की हिम्मत की।' उन्होंने दावा किया कि भाजपा का पतन शुरू हो गया है।
इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस पर संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 को पारित होने से रोककर महिलाओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में महिलाएं सत्तारूढ़ दल को सजा देंगी। बांकुड़ा जिले के बिष्णुपुर में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा।
उन्होंने TMC पर उस विधेयक का विरोध करने को लेकर हमला बोला, जिसका उद्देश्य 2029 से पहले संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था। उन्होंने भाजपा के लिए झटका माने जा रहे इस विधेयक के पारित न होने को पश्चिम बंगाल में भावनात्मक चुनावी मुद्दे में बदलने की कोशिश की, जहां महिला मतदाता और कल्याणकारी योजनाओं की लाभार्थी महिलाएं सबसे निर्णायक वोट बैंक बनकर उभरी हैं।







