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TMC में सियासी भूचाल: ममता बनर्जी ने EC को सौंपी नई कार्यसमिति, बागी गुट ने भी किया समानांतर संगठन का ऐलान

 
TMC में सियासी भूचाल: ममता बनर्जी ने EC को सौंपी नई कार्यसमिति, बागी गुट ने भी किया समानांतर संगठन का ऐलान

Kolkata News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी में बढ़ते असंतोष और बागी तेवरों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग (EC) को तृणमूल कांग्रेस की नई संशोधित राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची सौंप दी है। माना जा रहा है कि पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने और कानूनी दावेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, 22 जून को तैयार की गई इस नई सूची को उसी दिन नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के समक्ष जमा कराया गया। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने समानांतर कार्यसमिति की घोषणा कर पार्टी नेतृत्व को खुली चुनौती दे दी है।

बागी खेमे ने अपनी नई संरचना में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों को बाहर रखते हुए पूर्व मंत्री अरूप रॉय को चेयरमैन बनाया है। वहीं, फिरहाद हकीम और रथिन घोष को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान, संदीपान साहा और सबीना यास्मिन को महासचिव बनाया गया है, जबकि अखरुज्जमां को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी की नई कार्यसमिति में उन्हें अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखा गया है। नई सूची में सुब्रत बख्शी को उपाध्यक्ष, डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव तथा चंद्रिमा भट्टाचार्य को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही बागी खेमे में शामिल नेताओं को नई समिति से बाहर कर दिया गया है और नदीमुल हक को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि हाल ही में विधानसभा चुनाव में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद TMC के भीतर असंतोष तेजी से बढ़ा है। इससे पहले 5 जून को भी पार्टी ने नई कार्यसमिति का गठन किया था, लेकिन उसके बाद कई वरिष्ठ नेता और सांसद बागी खेमे के साथ चले गए। इनमें सायोनी घोष और माला रॉय जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर नए राजनीतिक दल ‘राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी’ का दामन थाम लिया है।

इस बीच, पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास ने पार्टी के बैंक खातों से वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाने की मांग करते हुए बैंक अधिकारियों को पत्र भेजा है, जिससे विवाद और गहरा गया है।

अब दोनों गुटों के अलग-अलग दावों के बीच सबकी निगाहें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि TMC के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर छिड़ी यह लड़ाई आगे चलकर अदालत तक भी पहुंच सकती है।