राजनीतिक दिखावा या अधूरा न्याय? महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे का सरकार पर बड़ा हमला
Congress President Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महिला आरक्षण बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर आपत्ति जताई है. उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस महिलाओं को 33% आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन जिस तरीके से यह कानून लागू करने का प्रावधान किया गया है, उस पर पार्टी को गंभीर आपत्ति है.

डिलिमिटेशन के नाम पर सरकार खेल कर रही: खरगे
उन्होंने कहा, "महिला आरक्षण बिल पर हमारी मांगें नहीं मानी गईं।" उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि चुनावी फायदे के लिए महिला आरक्षण बिल लाया जा रहा है और डिलिमिटेशन के नाम पर सरकार खेल कर रही है।
खरगे ने कहा, "हम सभी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं लेकिन हमें आपत्ति इसे पेश करने के तरीके को लेकर है। ये राजनीतिक रूप से प्रेरित है और विपक्ष पर प्रेशर बनाने के लिए सरकार ऐसा कर रही है।"
उन्होंने कहा, "हमने महिला आरक्षण विधेयक का लगातार समर्थन किया है, लेकिन हम चाहते हैं कि पहले के संशोधनों को लागू किया जाए। वे परिसीमन को लेकर कुछ चालें चल रहे हैं। हम सभी दलों को संसद में एकजुट होकर लड़ना चाहिए। हम इस विधेयक का विरोध करेंगे, लेकिन हम (महिलाओं के लिए) आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं।"
वे असम और जम्मू-कश्मीर में पहले ही हमें धोखा दे चुके हैं: खरगे
उन्होंने कहा, "जिस तरह से उन्होंने (सरकार) विधेयक में परिसीमन को शामिल किया है, उन्होंने जनगणना भी नहीं कराई है। संविधान की सभी शक्तियां कार्यपालिका द्वारा हथियाई जा रही हैं। ज्यादातर, जो शक्तियां संस्थाओं, संसद के पास होनी चाहिए, वे उन्हें इसलिए दी गई हैं ताकि वे किसी भी समय परिसीमन बदल सकें। वे असम और जम्मू-कश्मीर में पहले ही हमें धोखा दे चुके हैं।
खरगे ने ये बातें मीडिया को संबोधित करते हुए कहीं। इस दौरान उनके साथ कांग्रेस के सीनियर नेता केसी वेणुगोपाल और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव समेत अन्य नेता भी थे। खरगे के इस बिल को लेकर दिए बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है
विरोध की मुख्य वजहें क्या हैं?
1. परिसीमन से जोड़ा गया आरक्षण
खरगे का कहना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ दिया गया है. इसका मतलब यह हुआ कि यह कानून तुरंत लागू नहीं होगा. कांग्रेस का तर्क है कि इससे महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ कई सालों तक नहीं मिल पाएगा.
2. तत्काल लागू करने की मांग
कांग्रेस चाहती है कि महिला आरक्षण अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव से ही लागू हो, न कि भविष्य की किसी प्रक्रिया के बाद। खरगे ने इसे “महिलाओं के साथ अन्याय” बताया.
3. OBC और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग कोटा नहीं
खरगे ने कहा कि बिल में ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए कोई अलग आरक्षण नहीं है. कांग्रेस का आरोप है कि इससे सामाजिक न्याय का सिद्धांत कमजोर पड़ता है.
4. राजनीतिक दिखावा का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सरकार ने यह बिल राजनीतिक लाभ के लिए लाया है, जबकि इसे सही मायनों में लागू करने की कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की गई.
कांग्रेस का स्पष्ट रुख
- महिला आरक्षण का समर्थन
- लेकिन देरी वाले प्रावधानों का विरोध
- OBC महिलाओं के लिए सब-कोटा की मांग
खरगे ने कहा कि कांग्रेस संसद में महिला सशक्तिकरण के साथ खड़ी रहेगी, लेकिन ऐसे किसी भी प्रावधान का विरोध करेगी जो आरक्षण को सिर्फ कागजों तक सीमित कर दे. कुल मिलाकर, कांग्रेस का विरोध महिला आरक्षण से नहीं, बल्कि उसके लागू करने के तरीके को लेकर है.







