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यूपी में 2027 की तैयारी तेज, बीजेपी-सपा-बसपा-कांग्रेस ने कसी कमर; हर दल की अपनी चुनावी रणनीति

 
यूपी में 2027 की तैयारी तेज, बीजेपी-सपा-बसपा-कांग्रेस ने कसी कमर; हर दल की अपनी चुनावी रणनीति

UP News: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन सत्ता की दौड़ में शामिल प्रमुख दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। बीजेपी जहां संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और सरकार की योजनाओं के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने में जुटी है, वहीं समाजवादी पार्टी वादों और संगठनात्मक बैठकों के सहारे जमीन मजबूत कर रही है। बसपा अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने के साथ युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस चौपालों और जनसरोकार के मुद्दों के जरिए सक्रियता बढ़ा रही है।

बीजेपी का फोकस बूथ और लाभार्थी वोट बैंक पर

लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश कर रही बीजेपी ने चुनावी तैयारियों को संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर गति दी है। पार्टी का पुराना ‘बूथ जीता, चुनाव जीता’ वाला फॉर्मूला एक बार फिर रणनीति के केंद्र में है।

सरकार की ओर से विभिन्न वर्गों के लिए योजनाओं और घोषणाओं को भी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और 50 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने जैसी योजनाओं के जरिए नए मतदाता समूहों तक पहुंच बनाने की कोशिश हो रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मंडल स्तर के दौरे के बाद अब जिलेवार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। सरकार विकास कार्यों को उपलब्धि के तौर पर जनता के सामने रख रही है, जबकि संगठन जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटा है।

हाल के जेन-जी आंदोलन के बाद बीजेपी की रणनीति में युवा मतदाताओं पर भी खास जोर दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू होने वाले सेवा संकल्प अभियान में युवाओं को केंद्र में रखते हुए कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इसके अलावा सरकार ने युवा आयोग के गठन का भी ऐलान किया है।

सपा का संगठन मजबूत करने के साथ वादों पर जोर

मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी भी 2027 को लेकर सक्रिय है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार जिला और महानगर अध्यक्षों सहित प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर चुनावी तैयारियों का जायजा ले रहे हैं।

सपा की रणनीति में बूथ प्रबंधन को खास महत्व दिया जा रहा है। पार्टी समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से न कटें और पहले से हटाए गए नामों को दोबारा जुड़वाया जा सके, इसके लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है। सीटवार सर्वे और संभावित चुनावी समीकरणों पर भी काम चल रहा है।

वहीं, महिला और युवा मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए पार्टी कई घोषणाएं कर चुकी है। महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये देने, समाजवादी पेंशन और कन्या विद्याधन योजना को फिर शुरू करने के साथ यशभारती योजना बहाल करने जैसे वादे इसी रणनीति का हिस्सा हैं।

बसपा की नजर कोर वोट बैंक और युवा चेहरे पर

मौजूदा दौर में राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही बहुजन समाज पार्टी अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। पार्टी की रणनीति सिर्फ पुराने समर्थकों को बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल इंजीनियरिंग के जरिए अपना आधार बढ़ाने पर भी जोर है।

मायावती लगातार अपने समर्थकों को दूसरी पार्टियों की घोषणाओं और कथित लुभावने वादों को लेकर सावधान करती रही हैं। दूसरी ओर, आकाश आनंद को आगे कर बसपा युवा मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

पार्टी के लिए खास चुनौती युवा वर्ग को अपने साथ बनाए रखना है। इसी को देखते हुए संभावित उम्मीदवारों के साथ बैठकें और रणनीतिक सर्वे का दौर भी जारी है।

कांग्रेस की चौपालों के जरिए जमीन तलाशने की कोशिश

कांग्रेस भी संगठन को मजबूत करने के बाद अब चुनावी मोड में नजर आ रही है। पार्टी स्थानीय स्तर पर चौपालों और संवाद कार्यक्रमों के जरिए लोगों के बीच पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।

राम मंदिर से जुड़े चंदे के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाकर कांग्रेस बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रही है। वहीं पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े दूसरे मुद्दों को भी राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाया जा रहा है।

सपा के साथ गठबंधन के संभावित समीकरणों के बीच कांग्रेस राहुल गांधी को केंद्र में रखते हुए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

चुनाव से पहले शुरू हुआ सियासी शक्ति परीक्षण

2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों की गतिविधियां बता रही हैं कि तैयारी का असली दौर शुरू हो चुका है। बीजेपी सत्ता बरकरार रखने के लिए संगठन और सरकारी योजनाओं पर भरोसा कर रही है, सपा सत्ता विरोधी माहौल और नए वादों के सहारे वापसी की कोशिश में है। बसपा अपने आधार को फिर से मजबूत करने और कांग्रेस जनसरोकार के मुद्दों के जरिए जगह बनाने में जुटी है।

किस रणनीति का असर जमीन पर कितना पड़ता है, यह तो चुनावी नतीजे ही तय करेंगे। फिलहाल इतना साफ है कि 2027 के ‘सियासी समर’ से पहले यूपी में राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है।