₹26 लाख करोड़ की ‘कर्ज माफी’ पर संसद में गरजे संजय यादव- किसान-गरीब से भेदभाव का लगाया आरोप
किसका कर्ज माफ, किसका बोझ बरकरार?
सदन में बोलते हुए यादव ने सवाल उठाया कि इतने बड़े पैमाने पर माफ किए गए कर्ज में किसानों, मजदूरों और आम लोगों का हिस्सा कितना है? उन्होंने कहा कि जहां बड़े उद्योगपतियों को राहत दी जाती है, वहीं आम लोग छोटी-छोटी रकम के लिए भी बैंकिंग सिस्टम के दबाव में रहते हैं।
सामाजिक असमानता पर उठाए सवाल
राजद सांसद ने यह भी कहा कि जिन लोगों को इस कर्ज माफी का लाभ मिला, उनमें दलित, पिछड़े और आदिवासी वर्ग के लोगों की भागीदारी नगण्य है। उन्होंने इसे सामाजिक असंतुलन का उदाहरण बताते हुए सरकार से जवाब मांगा।
असमानता के आंकड़ों का हवाला
यादव ने वर्ल्ड इनेक्वालिटी लैब की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में आय और संपत्ति की असमानता खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। उनके अनुसार, देश की शीर्ष 1% आबादी के पास 22.6% आय और 40% संपत्ति है, जबकि निचले 60% लोगों के पास सिर्फ 3% संपत्ति है।
विकास के दावों पर उठे सवाल
उन्होंने सरकार के उस दावे पर भी सवाल खड़ा किया, जिसमें भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताया जाता है। यादव ने कहा कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत अभी भी 195 देशों में 141वें स्थान पर है, जो चिंता का विषय है।
संसद में उठे इन सवालों ने एक बार फिर देश में आर्थिक असमानता और नीतियों की प्राथमिकताओं को लेकर बहस को तेज कर दिया है।







