कोलकाता में स्टैच्यू विवाद: सॉल्ट लेक स्टेडियम के बाहर स्टैच्यू पर चलेगा बुलडोज, सार्वजनिक स्थल से हटाने के निर्देश
Kolkata: कोलकाता स्थित सॉल्ट लेक स्टेडियम के बाहर प्रस्तावित/स्थापित एक स्टैच्यू को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा डिज़ाइन की गई बताई जा रही इस प्रतिमा को हटाने (ध्वस्तीकरण) का आदेश जारी किया गया है. आदेश के अनुसार, निर्धारित मानकों और अनुमति प्रक्रियाओं का पालन न होने के कारण स्टैच्यू पर बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी.

क्या है पूरा मामला
प्रशासनिक आदेश में कहा गया है कि स्टैच्यू की स्थापना के लिए आवश्यक स्वीकृतियाँ, तकनीकी मंजूरी और भूमि उपयोग से जुड़े नियमों का अनुपालन नहीं किया गया। साथ ही, सार्वजनिक स्थल पर संरचना खड़ी करने के लिए जो प्रक्रियाएं अनिवार्य होती हैं, वे पूरी नहीं पाई गईं। इसी आधार पर संबंधित विभाग को तत्काल हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
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राज्य के नवनियुक्त खेल मंत्री निशिथ प्रामाणिक ने रविवार को मोहन बागान सुपर जाइंट और ईस्ट बंगाल एफसी के बीच खेले गए इंडियन सुपर लीग (ISL) कोलकाता डर्बी मैच के बाद यह बड़ा ऐलान किया. 1-1 से ड्रॉ रहे इस मुकाबले के बाद मीडिया से बात करते हुए खेल मंत्री ने इस ढांचे की कड़ी आलोचना की और इसे जल्द से जल्द गिराने की बात कही.
‘अजीबोगरीब और बेमतलब का ढांचा’
साल 2017 में फीफा अंडर-17 विश्व कप से ठीक पहले साल्ट लेक स्टेडियम के वीवीआईपी (VVIP) गेट के बाहर इस मूर्ति को स्थापित किया गया था. इस मूर्ति में विश्व बांग्ला लोगो के साथ जुड़े विशाल पैर और एक फुटबॉल दिखाई देती है, जिस पर ‘जॉयी’ लिखा हुआ है. इस ढांचे पर तीखा तंज कसते हुए खेल मंत्री ने कहा, “यह मूर्ति देखने में बेहद अजीबोगरीब और अनाकर्षक लगती है. धड़ से कटे हुए दो पैर और उसके ऊपर एक फुटबॉल रखने का कोई तार्किक मतलब समझ नहीं आता. कलात्मक रूप से भी यह बिल्कुल अच्छी नहीं है. हम ऐसे बेमतलब के ढांचे को वहां नहीं रखेंगे और इसे जल्द ही हटा दिया जाएगा.” उन्होंने राजनीतिक रूप से जोड़ते हुए यह भी कहा कि इस मूर्ति के लगने के बाद से ही पिछली सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए थे.
सरकारी प्लेटफॉर्म्स से हटेगा विश्व बांग्ला लोगो
खेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान राज्य सरकार ने स्टेडियम सहित सभी आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स और सार्वजनिक बुनियादी ढांचों से पुराने विश्व बांग्ला लोगो को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसकी जगह अब राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को लगाया जा रहा है. इसके साथ ही स्टेडियम में आने वाले खेल प्रेमियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई ढांचागत बदलावों की घोषणा की गई है. लंबे मैचों के दौरान दर्शकों को भोजन और पानी की असुविधा न हो, इसके लिए स्टेडियम परिसर के आसपास आधुनिक फूड कोर्ट बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है. रविवार को हुए डर्बी मैच में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के अध्यक्ष भी मौजूद थे. मैच के दौरान 62,000 से अधिक दर्शक पहुंचे थे और पूरा मुकाबला शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ.
लियोनेल मेसी विवाद पर एफआईआर
खेल मंत्री ने दिसंबर 2025 में कोलकाता में हुए लियोनेल मेसी के ‘गोएट टूर’ (GOAT Tour) विवाद पर भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि मेसी और उनके इंटर मियामी के साथी खिलाड़ियों का दौरा राज्य के लिए एक बड़ी वित्तीय और प्रशासनिक विफलता साबित हुआ था, जहां अव्यवस्था के कारण मेसी समय से पहले ही स्टेडियम छोड़कर चले गए थे. खेल मंत्री ने घोषणा की कि इस पूरे प्रकरण की दोबारा उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और जिन लोगों ने इस आयोजन को खराब किया, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. इसके साथ ही, जिन प्रशंसकों के पैसे डूबे थे, उन्हें रिफंड दिलाने के लिए भी सख्त कदम उठाए जाएंगे.
सवाल-जवाब
साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर से किस मूर्ति को हटाया जा रहा है?
साल्ट लेक स्टेडियम के वीवीआईपी गेट के बाहर लगी पूर्व मुख्यमंत्री [ममता बनर्जी] द्वारा डिजाइन की गई फुटबॉल-थीम वाली मूर्ति को हटाया जा रहा है, जिसे वर्तमान खेल मंत्री ने अजीबोगरीब और अनाकर्षक बताया है.
सरकारी ढांचों से ‘विश्व बांग्ला’ लोगो की जगह अब क्या लगाया जा रहा है?
राज्य सरकार साल्ट लेक स्टेडियम समेत सभी आधिकारिक जगहों और सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से पुराने ‘विश्व बांग्ला’ लोगो को हटाकर राष्ट्रीय प्रतीक ‘अशोक स्तंभ’ को शामिल कर रही है.
दिसंबर 2025 के लियोनेल मेसी विवाद को लेकर खेल मंत्री ने क्या कहा?
खेल मंत्री ने मेसी के दौरे के दौरान हुई अव्यवस्था की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया है और मैच देखने के लिए मोटी रकम खर्च करने वाले प्रशंसकों के टिकट का पैसा रिफंड कराने का भरोसा दिया है.







