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यूपी चुनाव से पहले हलचल तेज: अखिलेश यादव और CJP नेताओं की मुलाकात के बाद सियासी अटकलें शुरू

 
यूपी चुनाव से पहले हलचल तेज: अखिलेश यादव और CJP नेताओं की मुलाकात के बाद सियासी अटकलें शुरू

 

UP News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पदाधिकारियों के बीच हुई गुप्त बैठक ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

क्या है मुलाकात की असल वजह?


सूत्रों के मुताबिक, CJP पदाधिकारी आशुतोष रांका ने लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। इस डेढ़ घंटे चली बंद कमरे की बैठक को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।


हालांकि, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने इस मुलाकात के राजनीतिक मायने पर सफाई देते हुए इसे महज 'आभार जताने' का माध्यम बताया। सपा प्रवक्ता का कहना है कि यह मुलाकात इसलिए हुई क्योंकि हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन का समाजवादी पार्टी ने समर्थन किया था और संसद में भी

इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।


राजस्थान के 'स्कूल ठीक करो' अभियान का कनेक्शन
बताया जा रहा है कि इस बैठक के पीछे पिछले महीने राजस्थान में 'स्कूल ठीक करो' अभियान के दौरान CJP से जुड़े नेता पर हुआ कथित हमला भी एक बड़ा कारण रहा है। अखिलेश यादव ने इस पर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई थी। इसके अलावा, दोनों नेताओं के बीच युवाओं, छात्रों के मुद्दों के साथ-साथ 'जेन जी' और 'जेन अल्फा' की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। सपा लगातार बेरोजगारी, शिक्षा, महंगाई और स्कूलों के बंद होने जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरती रही है।

चुनाव लड़ने पर CJP नेताओं का रुख


एक इंटरव्यू के दौरान जब CJP से जुड़े नेताओं (सौरभ दास और रत्ना सिंह) से यह सवाल किया गया कि यदि अखिलेश यादव या राहुल गांधी का समर्थन मिलता है, तो क्या वे आगामी यूपी चुनाव लड़ेंगे?


इस पर रत्ना सिंह ने खुलकर भविष्य की योजना बताने से बचते हुए कहा कि वह वर्तमान में जीने में विश्वास रखती हैं और हर फैसला दिन-प्रतिदिन के हालात के आधार पर लेती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में वह चुनाव लड़ेंगी या नहीं या CJP के साथ किस रूप में जुड़ी रहेंगी, यह वक्त ही तय करेगा।


NDA का ऑफर ठुकराने के बाद चर्चा में CJP


दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने CJP फाउंडर अभिजीत दीपके को एनडीए (NDA) में शामिल होने का खुला ऑफर दिया था, जिसे दीपके ने ठुकरा दिया था। इन राजनीतिक घटनाक्रमों और दिल्ली के संसद मार्ग पर CJP के लगातार प्रदर्शनों के बीच, सपा के साथ यह बैठक उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावी समीकरणों में एक नया मोड़ ला सकती है।


भले ही दोनों दलों ने अभी आधिकारिक तौर पर किसी चुनावी गठबंधन या राजनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस मुलाकात ने यह साफ कर दिया है कि यूपी चुनाव से पहले छोटे और नए सियासी दल भी अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं।