Supreme Court Decision: 2008 अहमदाबाद ब्लास्ट केस में बड़ा मोड़! अहमद बावा की फांसी पर SC ने लगाई रोक
National: 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में मौत की सजा पाए अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरेलवी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उसकी मौत की सजा के अमल पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा है।


जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 1 अक्टूबर को बरेलवी की याचिका पर सुनवाई की। बरेलवी ने गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान बरेलवी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उसकी दोषसिद्धि मुख्य रूप से साजिश से जुड़े साक्ष्यों पर आधारित है। पीठ ने दलील सुनने के बाद मौत की सजा के अमल पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले में जवाब मांगा है। अदालत में बरेलवी की ओर से गुजरात हाई कोर्ट के फैसले की अनुवादित प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की गई, क्योंकि ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड गुजराती भाषा में हैं।

2008 में अहमदाबाद में हुए थे सिलसिलेवार धमाके
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। विभिन्न स्थानों पर हुए धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 200 लोग घायल हुए थे। गुजरात हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा को कायम रखा था।
विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में 49 दोषियों को सजा सुनाई थी। इनमें 38 को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद दी गई थी। हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में इन सजाओं को बरकरार रखा।
अब सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या होगा?
अहमद बावा की याचिका पर अब गुजरात सरकार का जवाब आने के बाद सुप्रीम कोर्ट मामले की आगे सुनवाई करेगा। फिलहाल शीर्ष अदालत का आदेश बरेलवी की मौत की सजा के अमल पर रोक तक सीमित है। इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी दोषसिद्धि या मौत की सजा को अंतिम रूप से रद्द कर दिया गया है।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक रिकॉर्ड में “Ahmed Bawa @ Abbu Abubakar Barelvi vs. The State of Gujarat” के नाम से दर्ज है।
हाई कोर्ट ने जुलाई में बरकरार रखी थी मौत की सजा
गुजरात हाई कोर्ट ने 7 जुलाई 2026 को अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत के 2022 के फैसले को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 दोषियों की उम्रकैद को कायम रखा था। इसके बाद मौत की सजा पाए दोषियों के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का रास्ता खुला।
अब अहमद बावा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस मामले में अगली महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया होगी।







