TMC नाम-चिह्न विवाद पर Supreme Court सख्त! EC से पूछा- मामला सुलझाने में कितना समय लगेगा ?
Kolkata: तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग से यह जानने को कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर दावे से जुड़े विवाद को अंतिम रूप से निपटाने में कितना समय लग सकता है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता डीएस नायडू से आयोग से समय-सीमा की जानकारी लेने को कहा। मुख्य न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि विवाद को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए।
सोमवार को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार के लिए निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उनकी ओर से फिलहाल चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग नहीं की जा रही है।
सिब्बल ने अदालत के समक्ष कहा कि अक्टूबर में प्रस्तावित नगर निगम चुनावों से पहले नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद का निपटारा हो जाना चाहिए।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और दोनों पक्षों की ओर से नामांकन भी दाखिल किए जा चुके हैं। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों को अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं और ऐसे में पहले चुनाव आयोग के अंतिम आदेश का इंतजार किया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग के अधिकार पर अदालत की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले का अंतिम निपटारा किस समय तक किया जाएगा, इस संबंध में निर्णय लेने का कानूनी अधिकार चुनाव आयोग के पास है।
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से सभी संबंधित दस्तावेज 2 जुलाई को जमा कर दिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष की ओर से बार-बार समय मांगा जा रहा है।
सिब्बल ने सवाल उठाया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के दौरान ही यह विवाद क्यों उठा और आयोग ने इससे पहले इस पर फैसला क्यों नहीं किया। उन्होंने अदालत से अंतरिम व्यवस्था की वैधता पर विचार करने का आग्रह किया।
'चुनाव प्रक्रिया पर रोक नहीं चाहते'
ममता बनर्जी की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से मौजूदा चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग नहीं की जा रही है। हालांकि, उन्होंने चुनाव आयोग को अक्टूबर तक विवाद का समाधान करने का निर्देश देने का अनुरोध किया।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि संबंधित पक्ष जुलाई-अगस्त में भी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते थे।
दूसरे पक्ष ने कहा- विवाद सुलझाने में समय लगता है
सुनवाई के दौरान रीतब्रत तृणमूल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद के निपटारे में समय लग सकता है। उन्होंने शिवसेना और एनसीपी से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इस तरह की समय-सीमा नहीं दी जानी चाहिए और उसे मामले की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
इस पर न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने शिवसेना मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत ने वहां लंबे समय तक चली प्रक्रिया के परिणाम देखे हैं।
अब सभी की नजर सोमवार को होने वाली अगली सुनवाई पर है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग से विवाद के निपटारे के लिए संभावित समय-सीमा को लेकर मिली जानकारी पर आगे विचार कर सकता है।







