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सुप्रीम कोर्ट की दो टूक- धरना स्थल किसी एक संगठन की जागीर नहीं, सभी को प्रदर्शन का अधिकार

प्रदर्शन के लिए समय सीमा तय हो: सुप्रीम कोर्ट बोला- दूसरे संगठनों को भी मिले धरने का मौका
 
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली सेंट्रल दिल्ली प्रोटेस्ट मामले में सुनवाई करते हुए एक अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि कोई भी प्रदर्शन के नाम पर अनिश्चित काल तक किसी जगह पर कब्जा नहीं कर सकता है। ऐसी गतिविधि के लिए तय जगहों का भी एक तय समय होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी पिछले महीने सेंट्रल दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शन और हाल ही में रामलीला मैदान में विपक्षी पार्टियों और दूसरों द्वारा भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किए गए प्रदर्शन पर सुनवाई के दौरान कही। सरकार ने जंतर-मंतर से तय धरना स्थल की सूची से हटा दिया है और रामलीला मैदान समेत तीन दूसरी जगहों का ऐलान किया।

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जो कोई भी प्रदर्शन का आह्वान करता है, उसे अपने कामों के नतीजे की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, आप हमेशा के लिए किसी जगह पर कब्जा नहीं कर सकते। दूसरे प्रदर्शनकारी भी हैं। किसान या वकील कहां जाएंगे? 

बेंच ने आगे कहा कि, हर किसी को प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने व्यापारी संगठन की उस याचिका पर केंद्र और दूसरों से जवाब मांगा, जिसमें त्योहारों के सीजन के दौरान प्रदर्शन रोकने की मांग की गई थी।

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जो कोई भी प्रदर्शन का आह्वान करता है, उसे अपने कामों के नतीजे की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, आप हमेशा के लिए किसी जगह पर कब्जा नहीं कर सकते। दूसरे प्रदर्शनकारी भी हैं। किसान या वकील कहां जाएंगे? 

बेंच ने आगे कहा कि, हर किसी को प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने व्यापारी संगठन की उस याचिका पर केंद्र और दूसरों से जवाब मांगा, जिसमें त्योहारों के सीजन के दौरान प्रदर्शन रोकने की मांग की गई थी।