SIR मुद्दे और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सुवेंदु अधिकारी का हमला, बोले- चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को लेकर अहम आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में राज्य की मुख्यमंत्री ने 19 जनवरी को याचिका दाखिल की थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान SIR प्रक्रिया के लिए पर्याप्त अधिकारियों की तैनाती पर जोर दिया था। अधिकारी के मुताबिक कोर्ट ने साफ किया है कि माइक्रो ऑब्जर्वर और ग्रुप-B स्तर के अधिकारी मिलकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार शुरुआत से ही SIR प्रक्रिया में माइक्रो ऑब्जर्वर्स की भूमिका कम करने की कोशिश कर रही थी। उनका दावा है कि जिन अधिकारियों को ग्रुप-B बताकर लगाया गया है, उनमें कई वास्तव में ग्रुप-C स्तर के कर्मचारी हैं। कुछ नाम पंचायत स्तर के कर्मियों के भी हैं और एक सूची में सेवानिवृत्त या मृत अधिकारी का नाम भी शामिल होने का आरोप उन्होंने लगाया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चुनाव कानून के अनुसार मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का अंतिम अधिकार ERO (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) के पास होता है। माइक्रो ऑब्जर्वर्स और अन्य अधिकारी सिर्फ प्रक्रिया में सहयोग करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी राजनीतिक दबाव में काम हुआ तो इसे अदालत की अवमानना माना जा सकता है।
सुवेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि केवल अधिकृत अधिकारी ही SIR प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में प्रशासन और पुलिस सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
अंतरिम बजट पर भी उन्होंने राज्य सरकार को घेरा। कहा कि चार महीने के बजट में रोजगार सृजन या खाली पदों को भरने का कोई ठोस प्लान नहीं है। उनके मुताबिक सरकार भत्तों और अनुदानों की घोषणा कर मूल मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है, जबकि युवाओं को नियमित भर्ती और पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया की जरूरत है।
अंत में उन्होंने कहा कि विपक्ष रोजगार, भर्ती और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेगा और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा कि मतदाता सूची का संशोधन कानून के मुताबिक और साफ तरीके से पूरा हो।







