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तारातला विवाद पर बंगाल विधानसभा में बवाल, शुभेंदु अधिकारी ने पेश किए सबूत

Kolkata: शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं जो तारातला मामले में कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करते हैं. उन्होंने सदन में दस्तावेज दिखाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और सरकार से जवाब मांगा. इसके साथ ही उन्होंने तृणमूल शासन के दौरान सरकार के भ्रष्टाचार के सबूत भी पेश किए, जो इस घटना के पीछे का कारण हो सकता है.
 
WEST BENGAL

Kolkata: पश्चिम बंगाल विधानसभा में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सदन के भीतर एक दस्तावेज लहराते हुए तारातला मामले को लेकर राज्य सरकार और मंत्री फिरहाद हकीम पर गंभीर सवाल उठाए. इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली.

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शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं जो तारातला मामले में कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करते हैं. उन्होंने सदन में दस्तावेज दिखाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और सरकार से जवाब मांगा. इसके साथ ही उन्होंने तृणमूल शासन के दौरान सरकार के भ्रष्टाचार के सबूत भी पेश किए, जो इस घटना के पीछे का कारण हो सकता है. उन्होंने बताया कि तृणमूल शासन के दौरान फिरहाद हकीम ने कोलकाता नगर निगम के महापौर रहते हुए कैसे इस परियोजना को मंजूरी दी थी.

विधानसभा के पूर्ण सत्र में मुख्यमंत्री ने एक दस्तावेज़ दिखाया. मुख्यमंत्री के हाथ में लहरा रहा यह दस्तावेज उस गोदाम का नक्शा था. शुवेंदु ने कहा- देखिए, इस पर पूर्व महापौर के हस्ताक्षर हैं. मुख्यमंत्री ने कहा-पूर्व महापौर इसमें शामिल हैं. माननीय फिरहाद हकीम के हस्ताक्षर देखिए. देखिए कि संरचना में खामियां होने के बावजूद योजना को कैसे मंजूरी दी गई. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि योजना पर वास्तुकार, ईएसी, जीटीई, भूमि मालिक और आवेदक के हस्ताक्षर हैं. मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि डिज़ाइन में खामियां होने के बावजूद योजना को कैसे मंजूरी दी गई.

कोलकाता नगर पालिका के वार्ड नंबर 80 में वह शापित गोदाम बन रहा था. उस इलाके के पार्षद अनवर खान, फिरहाद के करीबी माने जाते हैं. बुधवार को जब पार्षद मौके पर गए तो उनकी पिटाई की गई. इस मामले में फिरहाद का नाम भी सामने आया. उसी दिन शुभेंदु ने विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा- मुझे नहीं पता आपकी कोलकाता नगर निगम में क्या हुआ. अगर आप अपने काली को हटा देंगे तो सब कुछ ठीक हो जाएगा. कोलकाता नगर निगम में काली का नाम न हो तो कोई योजना नहीं बनती.