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11 जनवरी 1966 की वो रात… ताशकंद में क्या हुआ था? शास्त्री जी के निधन की कहानी

Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026:  2 अक्टूबर को महात्मा गांधी के साथ देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी मनाई जाती है. 1904 में जन्मे शास्त्री जी कम उम्र में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए और ब्रिटिश शासन के दौरान कई बार जेल गए. आजादी के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाली और 9 जून 1964 को देश के प्रधानमंत्री बने.
 
LAL BAHADUR SHASTRI

Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026:  2 अक्टूबर का दिन भारत के इतिहास में दो महान नेताओं की जयंती के तौर पर याद किया जाता है। इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी मनाई जाती है। सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए पहचाने जाने वाले शास्त्री जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने से लेकर आजाद भारत के नेतृत्व तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026 Wishes: लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर  सादगी और देशभक्ति से जुड़े ये संदेश अपनों को भेजकर दें शुभकामनाएं | Jansatta

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में हुआ था। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने कम उम्र में ही स्वतंत्रता आंदोलन में कदम रखा। ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलनों में भाग लेने के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।

कम उम्र में आजादी के आंदोलन से जुड़े

Lal Bahadur Shastri: A model of simplicity and greatness - NewsBharati

लाल बहादुर शास्त्री ने देश की आजादी के संघर्ष में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। वे महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले आंदोलनों से प्रभावित थे और असहयोग आंदोलन समेत स्वतंत्रता आंदोलन की विभिन्न गतिविधियों में शामिल हुए।

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। लंबे संघर्ष के बाद 1947 में देश आजाद हुआ और इसके बाद शास्त्री जी ने स्वतंत्र भारत के राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

आजादी के बाद निभाई कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

Lal Bahadur Shastri with Jawaharlal Nehru at an All India Congress Working Committee meeting in 1962.

आजादी के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वे रेल एवं परिवहन मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और गृह मंत्री जैसे पदों पर रहे।

रेल मंत्री के कार्यकाल से जुड़ी एक रेल दुर्घटना के बाद उनके इस्तीफे को अक्सर उनकी नैतिक जिम्मेदारी के उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। उनका मानना था कि सार्वजनिक पद केवल अधिकार नहीं, बल्कि जवाबदेही भी है।

1964 में बने देश के दूसरे प्रधानमंत्री

Remembering Lal Bahadur Shastri: Rare Pictures of the Former PM

पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद 9 जून 1964 को लाल बहादुर शास्त्री ने भारत के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।

उनका प्रधानमंत्री कार्यकाल लंबा नहीं रहा, लेकिन इस दौरान देश को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। खाद्यान्न की कमी, आर्थिक दबाव और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी परिस्थितियों के बीच उन्होंने देश को आत्मनिर्भरता और अनुशासन का संदेश दिया।

‘जय जवान, जय किसान’ ने दिया नया संदेश

लाल बहादुर शास्त्री का सबसे प्रसिद्ध नारा “जय जवान, जय किसान” माना जाता है। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान दिया गया यह संदेश देश की सुरक्षा और खाद्य उत्पादन दोनों के महत्व को सामने लाता था।

एक तरफ देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे जवान थे, तो दूसरी तरफ किसानों की भूमिका खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण थी। शास्त्री जी ने दोनों को राष्ट्र की शक्ति का महत्वपूर्ण आधार बताया।

खाद्य संकट के बीच आत्मनिर्भरता पर जोर

1960 के दशक में भारत गंभीर खाद्यान्न संकट से गुजर रहा था। देश को खाद्य पदार्थों के लिए आयात पर भी निर्भर रहना पड़ता था। ऐसे समय में शास्त्री सरकार ने कृषि उत्पादन बढ़ाने और खाद्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठाने पर जोर दिया।

शास्त्री जी ने कठिन परिस्थितियों में देशवासियों से संयम और सहयोग की अपील की। उनके सार्वजनिक जीवन में आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय अनुशासन पर विशेष जोर दिखाई देता है।

शास्त्री जी के चर्चित विचार

लाल बहादुर शास्त्री के नाम से जुड़ा सबसे लोकप्रिय संदेश “जय जवान, जय किसान” है। इसके अलावा उनके भाषणों और सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी जैसे विचार प्रमुख रहे।

उनका एक चर्चित संदेश था:

“हमारी ताकत और स्थिरता के लिए हमें अपने बीच एकता और भाईचारा बनाए रखना होगा।”

शास्त्री जी का सार्वजनिक जीवन इस बात का उदाहरण माना जाता है कि राजनीतिक नेतृत्व में व्यक्तिगत सादगी और सार्वजनिक जवाबदेही को महत्व दिया जा सकता है।

ताशकंद में हुआ निधन

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शांति वार्ता के लिए लाल बहादुर शास्त्री सोवियत संघ के ताशकंद पहुंचे। 10 जनवरी 1966 को भारत और पाकिस्तान के बीच ताशकंद घोषणा पर हस्ताक्षर हुए।

इसके अगले दिन, 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद से कई तरह के सवाल और दावे सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन दावों को लेकर अलग-अलग मत और दस्तावेज सामने आते रहे हैं, इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड और ऐतिहासिक स्रोतों को देखना जरूरी है।

आज भी याद किया जाता है शास्त्री जी का सादगी भरा जीवन

लाल बहादुर शास्त्री का राजनीतिक जीवन अपेक्षाकृत छोटा रहा, लेकिन उनकी सादगी, अनुशासन और सार्वजनिक जिम्मेदारी की छवि आज भी भारतीय राजनीति के इतिहास में चर्चा का विषय है।

2 अक्टूबर को मनाई जाने वाली शास्त्री जयंती देश के उस नेता को याद करने का अवसर है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में देश की सुरक्षा, खाद्य आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों पर काम किया।

उनका दिया “जय जवान, जय किसान” का संदेश आज भी भारतीय इतिहास और सार्वजनिक जीवन में सबसे चर्चित नारों में शामिल है।