Newshaat_Logo

दिल्ली में 6-7 जून को होगा 46वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह, 21 जोड़े लेंगे सात फेरे

 
दिल्ली में 6-7 जून को होगा 46वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह, 21 जोड़े लेंगे सात फेरे
New Delhi: दिव्यांगजनों के पुनर्वास और सामाजिक समावेशन की दिशा में कार्यरत नारायण सेवा संस्थान 6 और 7 जून को दिल्ली के रोहिणी स्थित गोल्डन स्टार बैंक्वेट में अपना 46वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करेगा। इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित 21 दिव्यांग एवं निर्धन वर-वधू जोड़े वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह बंधन में बंधेंगे।

संस्थान के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया की लगभग 16 प्रतिशत आबादी किसी न किसी प्रकार की दिव्यांगता के साथ जीवन जी रही है। विकासशील देशों में आर्थिक तंगी और सामाजिक पूर्वाग्रहों के कारण दिव्यांग युवक-युवतियों के लिए विवाह जैसे सामाजिक संस्कार भी कठिन हो जाते हैं। भारत में भी बड़ी संख्या में दिव्यांग युवा आर्थिक अभाव, सामाजिक संकोच और भविष्य की असुरक्षा के कारण वैवाहिक जीवन से वंचित रह जाते हैं।

इन्हीं चुनौतियों के समाधान के उद्देश्य से आयोजित इस समारोह में ऐसे जोड़े शामिल होंगे जिनमें कोई दृष्टिबाधित है, कोई श्रवण-बाधित, कोई व्हीलचेयर उपयोगकर्ता है तो कोई कृत्रिम अंगों की सहायता से जीवन जी रहा है। संस्थान का कहना है कि इनमें से अनेक युवक-युवतियों का निःशुल्क ऑपरेशन, कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण, सहायक उपकरण वितरण और कौशल प्रशिक्षण पहले ही कराया जा चुका है तथा अब उनके विवाह की जिम्मेदारी भी संस्था निभा रही है।

संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि पिछले 22 वर्षों में संस्था 2561 दिव्यांग युवक-युवतियों के विवाह संपन्न करा चुकी है। उन्होंने कहा कि संस्था दिव्यांगजनों के प्रति दया नहीं, बल्कि सम्मान, अवसर और सुरक्षित भविष्य देने के लिए संकल्पित है।

दिव्यांग विवाह में प्रमुख बाधाएं

संस्थान के अनुसार दिव्यांग विवाह के सामने सामाजिक पूर्वाग्रह, आर्थिक अभाव, शारीरिक निर्भरता, आत्मविश्वास की कमी, उपयुक्त जीवनसाथी का न मिलना और विवाह के बाद गृहस्थी की असुरक्षा जैसी चुनौतियां रहती हैं। संस्था इन समस्याओं के समाधान के लिए—

निःशुल्क चिकित्सा एवं ऑपरेशन

कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण

कौशल प्रशिक्षण एवं आजीविका मार्गदर्शन

उपयुक्त जोड़ों का चयन

विवाह की संपूर्ण निःशुल्क व्यवस्था

विवाहोपरांत गृहस्थी का सामान (बिस्तर, अलमारी, गैस, किचन सेट, पंखा, सिलाई मशीन और व्हीलचेयर आदि)


उपलब्ध कराती है।

समाज के लिए प्रेरक मॉडल

प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि दिव्यांगजन के पुनर्वास को विवाह और आत्मनिर्भर गृहस्थ जीवन से जोड़ने का यह प्रयास संस्थान का सफल मॉडल बन चुका है। उनका कहना है कि यह पहल केवल विवाह तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों को सम्मानजनक पारिवारिक जीवन से जोड़ने का सशक्त उदाहरण है।

दो दिवसीय आयोजन में वैदिक पूजा-पाठ, संगीत, मेहंदी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा। समारोह में जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, उद्योगपति और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग शामिल होकर नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देंगे।

संस्थान का मानना है कि यह आयोजन समाज को यह संदेश देगा कि सेवा, संवेदना और समर्पण के माध्यम से सच्ची मानवता को जीवंत रखा जा सकता है। मीडिया समन्वयक भगवान प्रसाद गौड़ ने बताया कि समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सभी चयनित जोड़ों एवं उनके परिवारों को आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।