‘लाल कोठी’ में लौटेगी बंगाल सरकार, राइटर्स बिल्डिंग बनेगा नया पावर सेंटर..भाजपा सरकार की बड़ी तैयारी...
West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के बाद अब राज्य की सत्ता का केंद्र भी बदलने जा रहा है. नई सरकार बनने के साथ ही मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने संकेत दिया है कि राज्य सरकार का संचालन अब हावड़ा स्थित ‘नबन्ना’ नहीं, बल्कि कोलकाता की ऐतिहासिक Writers' Building से किया जाएगा. यह वही इमारत है जिसे बंगाल की प्रशासनिक और राजनीतिक पहचान माना जाता रहा है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद छह मई को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने पत्रकारों से कहा था- "हमारी सरकार राइटर्स बिल्डिंग से चलेगी."
लाल रंग की यह इमारत स्वाधीन भारत में कोलकाता और उससे पहले ब्रिटिश शासन के दौरान पूरे देश की सत्ता का केंद्र रही है. सत्ता का केंद्र होने के कारण ही बंगाल के स्वाधीनता सेनानी विनय, बादल और दिनेश ने इस इमारत पर हमला किया था. अब इन तीनों की प्रतिमाएं इस इमारत के सामने के परिसर में सिर उठाए खड़ी हैं.
लेकिन वर्ष 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने करीब दो साल बाद यहां से सचिवालय हटा लिया था. उस समय यहां काम करने वाले ज़्यादातर विभाग दूसरी जगह चले गए. हुगली नदी के पार हावड़ा जिले के शिवपुर में जो बहुमंजिला इमारत पहले हुगली रिवर ब्रिज कमिश्नर और सरकारी वस्त्र विपणन समिति का दफ्तर थी, वही पश्चिम बंगाल सरकार का मुख्य सचिवालय बन गई.
नवान्न नामक इस 14-मंजिला इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दफ्तर बन गया. राइटर्स बिल्डिंग से सचिवालय को नवान्न में ले जाते समय सरकार ने दलील दी थी कि यह इमारत बहुत पुरानी हो गई है,. राज्य का लोक निर्माण विभाग वर्ष 2013 से ही उसकी मरम्मत और जीर्णोद्धार का काम कर रहा है. अब तक यह काम पूरा नहीं हो सका है.
करीब डेढ़ दशक तक पश्चिम बंगाल सरकार का मुख्य सचिवालय रहे नबन्ना को ममता बनर्जी सरकार ने प्रशासनिक केंद्र बनाया था. लेकिन अब सत्ता परिवर्तन के साथ भाजपा सरकार फिर से राइटर्स बिल्डिंग को ‘पावर सेंटर’ बनाने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अधिकारियों के साथ बैठक में राइटर्स बिल्डिंग के रेनोवेशन कार्य की प्रगति की जानकारी भी ली.
लेकिन राइटर्स बिल्डिंग से सचिवालय हटाने के बाद बीते करीब 13 साल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार भी नहीं कहा कि वो नवान्न छोड़ कर इस ऐतिहासिक इमारत में लौटने की इच्छुक हैं.
अब बीजेपी ने सचिवालय को राइटर्स बिल्डिंग में शिफ्ट करने का फैसला किया है. इस पर सोशल मीडिया में मजाकिया लहजे में कहा जा रहा है कि सरकार नीली इमारत से लाल इमारत में लौट रही है. दरअसल नवान्न का रंग सफेद और नीला है और राइटर्स का लाल.
क्या है राइटर्स बिल्डिंग का इतिहास?
कोलकाता के बीबीडी बाग इलाके में स्थित राइटर्स बिल्डिंग का निर्माण वर्ष 1777 में ईस्ट इंडिया कंपनी के जूनियर क्लर्कों यानी ‘राइटर्स’ के लिए कराया गया था. इसी कारण इसका नाम ‘राइटर्स बिल्डिंग’ पड़ा. ब्रिटिश शासन के दौरान यह प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया और बाद में स्वतंत्र भारत में पश्चिम बंगाल सरकार का सचिवालय बना.
लाल रंग की विशाल औपनिवेशिक शैली की यह इमारत बंगाल की राजनीति, प्रशासन और कई ऐतिहासिक घटनाओं की साक्षी रही है. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 1930 में क्रांतिकारी बिनॉय, बादल और दिनेश ने इसी भवन में ब्रिटिश अधिकारी कर्नल सिम्पसन पर हमला किया था। इसके बाद इस क्षेत्र का नाम बीबीडी बाग रखा गया.
क्यों खास है यह फैसला?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राइटर्स बिल्डिंग में वापसी केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है. भाजपा इसे बंगाल की ‘पुरानी प्रशासनिक विरासत’ की वापसी के तौर पर पेश कर रही है. सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में भी इस फैसले को लेकर काफी चर्चा है. कई लोगों का मानना है कि राइटर्स बिल्डिंग बंगाल की पहचान और प्रशासनिक गरिमा का प्रतीक है.
नबन्ना से क्यों हटेगी सरकार?
वर्ष 2011 में सत्ता में आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य सचिवालय को राइटर्स बिल्डिंग से हटाकर हावड़ा स्थित नबन्ना में शिफ्ट किया था. उस समय राइटर्स बिल्डिंग में मरम्मत और मेट्रो परियोजना के कारण काम प्रभावित होने की बात कही गई थी. इसके बाद से प्रशासनिक कामकाज नबन्ना से ही चल रहा था
अब भाजपा सरकार का कहना है कि राइटर्स बिल्डिंग का रेनोवेशन अंतिम चरण में है और जल्द ही मुख्यमंत्री कार्यालय समेत कई प्रमुख विभाग यहां शिफ्ट किए जाएंगे.
सरकार बनने के बाद तेज हुए बदलाव
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ लेने के तुरंत बाद प्रशासनिक फेरबदल शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री कार्यालय में कई नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है और शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत दिए गए हैं। पहली कैबिनेट बैठक नबन्ना में हुई, लेकिन सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य राइटर्स बिल्डिंग से प्रशासन चलाना बताया जा रहा है.







