TMC में बगावत के सुर तेज! विधायकों की दूरी के बाद 31 पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा, बंगाल की राजनीति में मचा भूचाल
हाल ही में विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास आयोजित टीएमसी के धरना-प्रदर्शन में पार्टी के 80 विधायकों में से केवल 36 विधायक ही शामिल हुए। इससे पहले कालीघाट में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक से भी करीब 15 विधायक नदारद रहे थे। लगातार बढ़ रही अनुपस्थिति को पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।
कांचरापाड़ा और हलीशहर में बड़ा झटका
टीएमसी को सबसे बड़ा झटका उत्तर 24 परगना जिले की दो नगरपालिकाओं से लगा है। कांचरापाड़ा नगरपालिका के 24 पार्षदों में से 15 ने इस्तीफा दे दिया, जबकि हलीशहर नगरपालिका के 23 में से 16 पार्षदों ने सामूहिक रूप से पद छोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि 17 मई को कल्याणी में हुई एक बैठक के दौरान इस्तीफे का फैसला लिया गया था। इसके बाद 20 मई को हलीशहर नगरपालिका में आयोजित आपात बैठक में पार्षद राजू साहनी के नेतृत्व में इस्तीफे सौंपे गए।
भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं तेज
इस्तीफों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि असंतुष्ट पार्षद जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में बिजपुर से भाजपा विधायक Sudipta Das ने नगरपालिका प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की थी।
इस्तीफा देने वाले समूह में पांच महिला पार्षद भी शामिल हैं। हालांकि हलीशहर नगरपालिका के अध्यक्ष शुभंकर घोष ने इस्तीफा नहीं दिया है और वे अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
भाजपा विधायक सुदीप्त दास ने दावा किया कि नगरपालिका की सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी और आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। वहीं दूसरी ओर, इन सामूहिक इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर असंतुष्ट नेताओं का यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े राजनीतिक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।







