TMC Symbol War: आज तय हो सकता है किसे मिलेगा ‘जोड़ा फूल’
Kolkata: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग के सामने पहुंच चुका है। आयोग ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को पार्टी के दोनों विरोधी खेमों को अलग-अलग समय पर सुनवाई के लिए बुलाया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट दोपहर 3 बजे, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट शाम 4 बजे अपनी दलीलें रखेगा।
यह विवाद ऐसे समय में चल रहा है जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों खेमों ने इन चुनावों के लिए उम्मीदवार उतारे हैं और पार्टी के पारंपरिक ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न पर अपना दावा जताया है।
‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न पर किसका दावा?
चुनाव आयोग के सामने विवाद केवल चुनाव चिह्न तक सीमित नहीं है। दोनों पक्षों की ओर से पार्टी के नाम, संगठनात्मक नियंत्रण, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और पार्टी से जुड़े संसाधनों पर भी दावे किए गए हैं। आयोग ने 12 सितंबर को दोनों पक्षों की प्रस्तुतियां सुनी थीं और इसके बाद अतिरिक्त दस्तावेज मांगे थे।
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर अपना दावा पेश किया है। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे ने प्रतिद्वंद्वी गुट के दावों और उसके संगठनात्मक दावे पर आपत्ति जताई है।
दोनों गुटों ने जमा किए दस्तावेज
उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर थी। इसी दिन दोनों पक्षों के लिए अतिरिक्त दस्तावेज और अंतिम दलीलें जमा करने की समयसीमा भी पूरी हुई। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से प्राप्त दस्तावेजों पर विचार करने के बाद 17 सितंबर को आगे की सुनवाई तय की है।
अब आयोग के सामने दोनों खेमों की ओर से प्रस्तुत संगठनात्मक दावों, दस्तावेजों और अधिकृत प्रतिनिधियों से जुड़े पक्षों की जांच का अहम चरण है।
संगठनात्मक ढांचे पर भी आयोग की नजर
चुनाव आयोग फिलहाल इस बात से जुड़े दावों की जांच कर रहा है कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के संबंध में किस पक्ष की स्थिति वैध मानी जाए। हालांकि, आयोग ने अभी तक औपचारिक रूप से यह घोषणा नहीं की है कि वह किस गुट को पार्टी का अधिकृत प्रतिनिधि मानता है।
ऋतब्रत गुट का तर्क है कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। दूसरी ओर, ममता बनर्जी गुट ने इन दावों को चुनौती देते हुए पार्टी के संगठनात्मक चुनाव और संविधान में हुए बदलावों का हवाला दिया है।
चुनाव चिह्न को लेकर क्या हो सकता है फैसला?
मौजूदा स्थिति में चुनाव चिह्न को लेकर कई संभावनाओं पर चर्चा है। रिपोर्टों के अनुसार आयोग किसी एक गुट को चुनाव चिह्न के इस्तेमाल की अनुमति दे सकता है। इसके अलावा चुनाव चिह्न को दोनों पक्षों के लिए रोकने या मामले के अंतिम निपटारे तक अलग व्यवस्था करने जैसे विकल्पों पर भी विचार हो सकता है।
हालांकि, अंतिम फैसला चुनाव आयोग ही करेगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि गुरुवार की सुनवाई के बाद आयोग तत्काल कोई अंतरिम आदेश जारी करेगा या आगे की प्रक्रिया तय करेगा।
उपचुनाव के कारण बढ़ी अहमियत
नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव के लिए दोनों गुटों द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने के कारण चुनाव चिह्न से जुड़ा विवाद और महत्वपूर्ण हो गया है। आयोग को दोनों पक्षों के दावों पर विचार करते हुए चुनावी प्रक्रिया के अगले चरणों को भी ध्यान में रखना होगा। नामांकन की जांच की प्रक्रिया 19 सितंबर तक पूरी होनी है।
ऐसे में गुरुवार की सुनवाई के बाद चुनाव चिह्न और पार्टी की आधिकारिक पहचान को लेकर तस्वीर कुछ हद तक स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में चुनाव आयोग के समक्ष दस्तावेज और कानूनी तर्क पेश कर रहे हैं।







