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TMC के 804 करोड़ वाले खाते फ्रीज! सुप्रीम कोर्ट से ममता को बड़ा झटका

Kolkata:  तृणमूल कांग्रेस के फ्रीज किए गए चार बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगने वाली ममता बनर्जी गुट की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राहत देने से इनकार कर दिया. इन चार खातों में करीब 804 करोड़ रुपये होने की रिपोर्ट है. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस बी. वराले की पीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए मुख्य मामले की सुनवाई जल्द करने का अनुरोध किया.
 
KOLKATA

Kolkata:  तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों को लेकर चल रहे विवाद में ममता बनर्जी गुट को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें फ्रीज किए गए चार बैंक खातों को संचालित करने की मांग पर राहत नहीं दी गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, इन चार खातों में कुल करीब 804 करोड़ रुपये जमा हैं।

ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, अनुब्रत मंडल बागी गुट में शामिल - mamata  banerjee tmc anubrata mandal birbhum west bengal ritabrata ntc amkr - AajTak

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लेकर यह भी संकेत दिया कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद के बीच पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित खातों को संचालित करने का अधिकार किस गुट के पास है।

चार खातों को संचालित करने की मांग

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर फ्रीज किए गए चार बैंक खातों से लेन-देन की अनुमति मांगी थी। पार्टी की ओर से दलील दी गई कि उसके रोजमर्रा के कामकाज के लिए हर महीने करीब 12.15 करोड़ रुपये की जरूरत है।

पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि आगामी चुनावों के मद्देनजर संगठन के नियमित खर्च और चुनावी गतिविधियों के लिए धन की आवश्यकता है। वहीं, खातों में मौजूद राशि में से केवल आवश्यक खर्च के लिए सीमित रकम इस्तेमाल करने का प्रस्ताव भी अदालत के सामने रखा गया।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में नहीं किया हस्तक्षेप

सुप्रीम कोर्ट ने ममता गुट को तत्काल खाते संचालित करने की अनुमति देने के बजाय कलकत्ता हाई कोर्ट के समक्ष लंबित कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं किया। अदालत ने हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया है।

इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खातों से जुड़े मामले में एक विशेष व्यवस्था के तहत पार्टी के दैनिक खर्चों को पूरा करने की अनुमति दी थी। अदालत ने खर्च की निगरानी के लिए विशेष अधिकारी की व्यवस्था भी की थी।

पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी विवाद

TMC के बैंक खातों का विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर भी दो गुटों के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है।

चुनाव आयोग ने सितंबर में पार्टी के नाम और पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह को अंतरिम रूप से फ्रीज कर दिया था। इसके बाद ममता बनर्जी गुट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में चुनाव आयोग को विवाद का निपटारा निर्धारित समय सीमा में करने का निर्देश दिया।

ऐसे में बैंक खातों के संचालन के अधिकार को लेकर भी पार्टी के भीतर चल रहा विवाद सीधे तौर पर नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े मामले से जुड़ गया है।

कोर्ट में ‘असली पार्टी’ के अधिकार का सवाल

सुनवाई के दौरान यह सवाल भी सामने आया कि जब पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर ही विवाद चल रहा है, तो बैंक खातों पर अधिकार का निर्धारण किस आधार पर किया जाए।

ममता गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पार्टी के नियमित कामकाज और चुनावी गतिविधियों के लिए धन की आवश्यकता का पक्ष रखा। दूसरी ओर, केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने खातों से जुड़े वित्तीय लेन-देन और जांच का मुद्दा उठाया।

ईडी की जांच में क्या है मामला?

बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जांच के संदर्भ में हुई है। जांच एजेंसी की ओर से आरोप लगाया गया है कि कुछ संदिग्ध लेन-देन के जरिए बड़ी रकम पार्टी से जुड़े खातों में पहुंची।

मामले की पिछली कार्यवाही में ईडी ने कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन का भी उल्लेख किया था। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक कार्यवाही पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

पहले तीन खातों पर भी हुआ था विवाद

इससे पहले TMC से जुड़े तीन बैंक खातों को लेकर भी विवाद हुआ था। जुलाई में इन खातों को डेबिट-फ्रीज किए जाने के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक विशेष अधिकारी की निगरानी में सीमित तरीके से रकम के इस्तेमाल की व्यवस्था की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उस अंतरिम व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था।

अब चार खातों से जुड़े नए चरण में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी गुट की तत्काल राहत की मांग स्वीकार नहीं की है और मामले को हाई कोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया है।

आगे क्या होगा?

अब इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। वहीं, TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग की कार्यवाही भी पार्टी के दोनों गुटों के लिए अहम बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस विवाद पर निर्धारित समय सीमा में फैसला लेने का निर्देश दिया है।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश का सीधा असर यह है कि ममता बनर्जी गुट को फ्रीज किए गए चारों खातों से अपनी मांग के मुताबिक स्वतंत्र रूप से लेन-देन करने की तत्काल अनुमति नहीं मिली है।