‘तिरंगा होगा पहचान, अहिंसा होगी ताकत’- संसद मार्च से पहले योगेंद्र यादव ने आंदोलनकारियों को दिए पांच संकल्प
New Delhi: संसद मार्च से पहले सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने आंदोलनकारियों से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की। जंतर-मंतर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की लंबी लड़ाई है। उन्होंने 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च के लिए प्रदर्शनकारियों के सामने पांच संकल्प रखे और सभी से उनका पालन करने का आग्रह किया।
योगेंद्र यादव ने कहा कि मार्च के दौरान केवल राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा ही हाथों में होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल या संगठन का झंडा प्रदर्शन में शामिल नहीं किया जाएगा।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे अपने हाथों में भारतीय संविधान, महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, भगत सिंह या अन्य महान व्यक्तित्वों की तस्वीरें रखें। उनका कहना था कि आंदोलन का संदेश सकारात्मक और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।
नकारात्मक नारों से दूरी बनाने की अपील
योगेंद्र यादव ने कहा कि आंदोलन के दौरान किसी भी तरह के आपत्तिजनक या नकारात्मक नारे नहीं लगाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी केवल ‘जय हिंद’, ‘भारत माता की जय’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘जय भीम’ जैसे सकारात्मक नारों का ही इस्तेमाल करें। उनके मुताबिक, आंदोलन की ताकत उसकी गरिमा और विचारों में होनी चाहिए, न कि कटु भाषा में।
अनुशासन और अहिंसा पर दिया जोर
उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आयोजन के दौरान अनुशासन बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मंच और स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक उम्र में छोटे हों या बड़े, उनके निर्देशों का सम्मान किया जाना चाहिए।
योगेंद्र यादव ने अपने पांचवें संकल्प में अहिंसा को आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा का सहारा नहीं लिया जाएगा। उन्होंने अपने पुराने आंदोलनकारी दिनों का नारा दोहराते हुए कहा, “हमला चाहे जैसा भी हो, हाथ हमारा नहीं उठेगा।”
20 जुलाई के संसद मार्च का किया आह्वान
योगेंद्र यादव ने प्रदर्शनकारियों से अधिक से अधिक संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन की सफलता हिंसा से नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी, ईमानदारी, सच्चाई और शांतिपूर्ण संघर्ष से तय होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि 20 जुलाई का संसद मार्च लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन अब केवल किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का व्यापक अभियान बन चुका है।







