बंगाल विधानसभा में यूनिवर्सिटी संशोधन बिल पास! शुभेंदु बोले- नाखुश हैं तो नौकरी छोड़ दें...
Kolkata: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय एवं कॉलेज (प्रशासन और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन के बाद जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का तबादला कर सकेगी। राज्य मंत्रिमंडल ने इस विधेयक को 8 सितंबर को मंजूरी दी थी।

टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के तबादले का प्रावधान
अधिकारियों के मुताबिक, संशोधन विधेयक में 2017 के मौजूदा कानून की धारा 14ए में नया प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके तहत प्रशासनिक जरूरत और संस्थानों की आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों को एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में स्थानांतरित किया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि इससे विभिन्न विश्वविद्यालयों के बीच अनुभवी मानव संसाधन का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
नए विश्वविद्यालयों में भेजे जाएंगे अनुभवी शिक्षक
विधेयक पर चर्चा के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अनुभवी शिक्षकों और अधिकारियों को नए स्थापित विश्वविद्यालयों में भेजने से इन संस्थानों को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। उनके अनुसार, झारग्राम और कूचबिहार जैसे जिलों में बने नए विश्वविद्यालयों को अनुभवी मानव संसाधन का लाभ दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अनुभवी प्रोफेसर नए संस्थानों में बुनियादी ढांचे, कक्षाओं के संचालन और अकादमिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में मार्गदर्शन दे सकते हैं।
शोध और पीएचडी व्यवस्था पर असर नहीं
विधेयक पर चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि नए प्रावधानों से पीएचडी की निगरानी और शोध परियोजनाओं पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और सरकार की जवाबदेही के बीच संतुलन बनाने की दिशा में जरूरी कदम बताया।
शुभेंदु अधिकारी ने विधेयक का विरोध करने वालों पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग इसके प्रावधानों से असंतुष्ट हैं, वे अपनी नौकरी छोड़ने के लिए स्वतंत्र हैं।
सरकार ने बताया संशोधन को जरूरी
मौजूदा कानून में संशोधन की जरूरत पर सरकार की ओर से कहा गया कि बदलती प्रशासनिक और संस्थागत जरूरतों को देखते हुए यह कदम जरूरी था। विधेयक के लागू होने के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की तैनाती और मानव संसाधन प्रबंधन की व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है।
यह संशोधन खास तौर पर नए विश्वविद्यालयों में अनुभवी शिक्षकों और कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने पर केंद्रित माना जा रहा है।







