निवेश से आगे बढ़ी यूपी-जापान साझेदारी, 2047 के ग्लोबल फ्यूचर की तैयारी में जुटेगा उत्तर प्रदेश: सीएम योगी
UP News: उत्तर प्रदेश और जापान के रिश्ते अब केवल निवेश और कारोबार तक सीमित नहीं रहेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच दीर्घकालिक और भरोसे पर आधारित साझेदारी विकसित की जाएगी। जापान की तकनीकी दक्षता और उत्तर प्रदेश की विशाल युवा शक्ति, बाजार तथा औद्योगिक क्षमता के मेल से प्रदेश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का प्रमुख केंद्र बनाने का लक्ष्य है।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान को उत्तर प्रदेश केवल निवेशक के तौर पर नहीं, बल्कि भविष्य के विकास का ‘को-क्रिएटर’ मानता है। सरकार की प्राथमिकता एमओयू को जमीन पर उतारकर उत्पादन, उत्पादन को निर्यात और निवेश को रोजगार में बदलना है।
जापानी मेहमानों का जापानी भाषा में किया अभिवादन
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत जापानी भाषा में किया। उन्होंने “कोनिचिवा मिनासान” कहकर अतिथियों का अभिवादन किया और संबोधन के अंत में “अरिगातो गोजाइमासु” कहकर आभार जताया। मुख्यमंत्री के इस अंदाज ने कार्यक्रम में भारत-जापान के सांस्कृतिक रिश्तों की झलक भी दिखाई।
योगी ने कहा कि जापान में हुई चर्चाओं का परिणाम अब उत्तर प्रदेश में दिखाई देने लगा है। पिछले दिनों हुई बातचीत निवेश, उद्योग और रोजगार से जुड़े ठोस अवसरों में बदल रही है। उन्होंने जापान की कार्यसंस्कृति में अनुशासन, गुणवत्ता, नवाचार और सामूहिक जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इन मूल्यों से यूपी के युवाओं को भी जोड़ा जाएगा।
यामानाशी के लिए बनेगा अलग डेस्क, हर 90 दिन में होगी समीक्षा
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के बीच सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए इन्वेस्ट यूपी में डेडिकेटेड यामानाशी डेस्क बनाया जाएगा। यह डेस्क यामानाशी सरकार, वहां की कंपनियों और निवेशकों के साथ लगातार समन्वय करेगा।
निवेश परियोजनाओं, मंजूरियों और उद्योगों से जुड़ी समस्याओं की हर 90 दिन में समीक्षा किए जाने की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यामानाशी के गवर्नर को वहां की एमएसएमई कंपनियों के यूपी में निवेश के लिए 600 करोड़ रुपये का फंड घोषित करने के लिए धन्यवाद दिया।
युवाओं को जापानी भाषा और तकनीकी कौशल से जोड़ने पर जोर
सीएम योगी ने कहा कि यूपी के युवाओं को जापानी भाषा, तकनीकी प्रशिक्षण और जापानी वर्क कल्चर से जोड़ने की जरूरत है। जापानी कंपनियों की जरूरत के मुताबिक प्रदेश में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे।
पॉलिटेक्निक, नर्सिंग और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए जापानी भाषा का प्रशिक्षण, रोजगार और ट्रेनिंग के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य “इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार स्किल और स्किल के अनुसार एंप्लॉयमेंट” का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है।
बौद्ध सर्किट से जापानी पर्यटकों को जोड़ने की तैयारी
उत्तर प्रदेश जापानी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अपने बौद्ध सर्किट को प्रमुखता से विकसित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आध्यात्मिक, बौद्ध, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं।
जापान में होने वाले पर्यटन आयोजनों में यूपी की संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और आतिथ्य को प्रदर्शित करने की योजना भी है। इससे पर्यटन के साथ-साथ दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।
ग्रीन हाइड्रोजन में बनेगा यूपी-यामानाशी सहयोग
मुख्यमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल करते हुए कहा कि यामानाशी के साथ इस क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट विकसित किया जाएगा। आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की दिशा में हो रहे कार्यों का भी उल्लेख किया गया।
भारतीय और जापानी कंपनियों के बीच तकनीक एवं व्यावसायिक साझेदारी विकसित करने की योजना है। अक्टूबर 2026 में यामानाशी में होने वाले इंटरनेशनल हाइड्रोजन समिट में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधिमंडल भी हिस्सा लेगा।
जापानी GCC कंपनियों को यूपी में कारोबार का न्योता
मुख्यमंत्री ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में विकसित हो रहे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए जापानी कंपनियों को यूपी में निवेश का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तैयार होने वाले उत्पादों को भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक ढांचा तैयार किया गया है।
योगी ने कहा कि 2047 तक भारत की विकास यात्रा में जापान उत्तर प्रदेश का विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार बने, यही सरकार की कोशिश है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में यूपी में काम करने वाली जापानी कंपनियां केवल भारत में निवेश की बात न करें, बल्कि यह कहें कि उन्होंने अपना “ग्लोबल फ्यूचर उत्तर प्रदेश से बनाया।”
कार्यक्रम में यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी, वाइस गवर्नर जुनिची इशिदेरा, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी सहित प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, जापानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य, उद्योगपति और विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।







