आपदा से निपटने में यूपी की बदली तस्वीर, SDRF से हाईटेक कमांड सेंटर तक मजबूत हुआ राहत तंत्र
UP News: उत्तर प्रदेश में आपदा प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर पिछले कुछ वर्षों में व्यापक बदलाव किए गए हैं। सरकार के मुताबिक अब राहत व्यवस्था केवल घटना के बाद सहायता पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि त्वरित बचाव, तकनीक आधारित निगरानी, पूर्व तैयारी और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर भी जोर दिया जा रहा है।
2017 से पहले गंभीर आपदाओं के समय राहत और बचाव की जिम्मेदारी मुख्य रूप से स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राजस्व विभाग पर रहती थी। बड़े हादसों में केंद्रीय एजेंसियों से मदद मिलने का इंतजार करना पड़ता था। अब प्रदेश में अपनी स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) के साथ आधुनिक कमांड सेंटर और बेहतर रेस्क्यू सिस्टम विकसित किया गया है।
SDRF ने बढ़ाई राज्य की अपनी रेस्क्यू क्षमता
योगी सरकार के कार्यकाल में SDRF का गठन किया गया। इसमें विभिन्न आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों के साथ मेडिकल और फायर टीमों को भी शामिल किया गया है।
बाढ़, भूकंप, आग, दुर्घटना और इमारत गिरने जैसी घटनाओं में राज्य की अपनी प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ने का दावा किया गया है। इससे हर गंभीर घटना में NDRF जैसी केंद्रीय एजेंसियों पर पूरी तरह निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
200 करोड़ से ज्यादा की लागत से हाईटेक मुख्यालय
आपदा प्रबंधन को तकनीक से जोड़ने के लिए UPSDMA का नया हाईटेक मुख्यालय तैयार किया गया है। वर्ष 2026 में तैयार इस भवन पर 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है।
यहां 24 घंटे सक्रिय इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर और डिजिटल कमांड-कंट्रोल सिस्टम की व्यवस्था है। इसका इस्तेमाल आपदा की सूचना जुटाने, जिलों के साथ समन्वय, राहत टीमों को निर्देश देने और अभियान की निगरानी के लिए किया जा सकेगा।
राहत के दायरे में बढ़ी कई घटनाएं
आपदा राहत व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव सहायता के दायरे को बढ़ाना भी है। अब बाढ़ के अलावा डूबने, सर्पदंश, आकाशीय बिजली, भूकंप, भूस्खलन और मिट्टी धंसने जैसी घटनाओं में भी निर्धारित नियमों के तहत सरकारी सहायता का प्रावधान है।
सांड के हमले जैसी घटनाओं को भी राज्य स्तर पर राहत के दायरे में शामिल किया गया है। इससे खासकर ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाओं से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता आसान हुआ है।
मौत पर मुआवजा 1.50 लाख से बढ़कर 4 लाख
आपदा में मृत्यु होने पर मिलने वाली अनुग्रह राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। 2010-15 के दौरान जहां यह राशि करीब 1.50 लाख रुपये थी, वहीं संशोधित SDRF और NDRF मानकों के बाद मृत्यु के मामलों में सहायता 4 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए सहायता करीब 95,100 रुपये तक और कपड़े-बर्तन के लिए सहायता 1,800 से 2,000 रुपये तक की गई है। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए भी निर्धारित आर्थिक सहायता बढ़ाई गई है।
सात दिन में भुगतान का लक्ष्य
सरकार ने आपदा में मृत्यु के मामलों में पात्र परिवारों को जल्द सहायता उपलब्ध कराने के लिए भुगतान प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया है। इसके तहत सात दिनों के भीतर सहायता राशि देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सर्पदंश के मामलों में पहले पोस्टमार्टम और विसरा सुरक्षित रखने जैसी प्रक्रियाओं के कारण भुगतान में देरी हो सकती थी। प्रक्रिया में बदलाव के जरिए पात्र परिवारों को तेजी से सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
राहत किट में 17 तरह की सामग्री
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री को भी अधिक व्यवस्थित और मानकीकृत किया गया है। वर्तमान राहत किट में 17 प्रकार की जरूरी सामग्री शामिल है।
इसमें 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 10 किलो आलू, 5 किलो लाई, 2 किलो भुना चना, 2 किलो अरहर दाल, नमक, हल्दी, मिर्च, धनिया, 5 लीटर रिफाइंड तेल, माचिस, मोमबत्ती और बिस्किट जैसी सामग्री शामिल है। पानी को पीने योग्य बनाने के लिए क्लोरीन की गोलियां और नहाने का साबुन भी दिया जाता है।
महिलाओं के लिए डिग्निटी किट, पशुओं के चारे का भी इंतजाम
आपदा के दौरान महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिग्निटी किट की व्यवस्था की गई है। इसके जरिए राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की आवश्यकताओं का ध्यान रखने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके अलावा प्रभावित परिवारों के पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी राहत प्रणाली में शामिल की गई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत शिविर, बाढ़ चौकियां, नाव और मोटरबोट के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने के साथ मेडिकल टीमों की तैनाती, फॉगिंग और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
राहत के साथ अब तैयारी और त्वरित कार्रवाई पर फोकस
उत्तर प्रदेश की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अब केवल राहत वितरण और मुआवजे तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। SDRF, डिजिटल कमांड सेंटर, विस्तारित राहत दायरा, मानकीकृत राहत किट और तेज भुगतान व्यवस्था के जरिए आपदा से पहले तैयारी और घटना के बाद त्वरित प्रतिक्रिया को मजबूत करने पर जोर है।
सरकार का दावा है कि इन बदलावों से प्रदेश में आपदा के दौरान प्रशासन की प्रतिक्रिया अधिक तेज, समन्वित और तकनीक आधारित हुई है, जिससे प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनाया जा सके।







