आपदा प्रबंधन में यूपी की नई तस्वीर: SDRF से हाईटेक कमांड सेंटर तक, पीड़ितों को 4 लाख तक मदद
UP News: उत्तर प्रदेश में आपदा के दौरान राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर पिछले कुछ वर्षों में बड़े बदलाव किए गए हैं। सरकार का दावा है कि अब प्रदेश केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बचाव, त्वरित प्रतिक्रिया, तकनीक आधारित निगरानी और पुनर्वास को एकीकृत व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है।
योगी सरकार के अनुसार, पहले गंभीर आपदाओं के समय राहत और बचाव के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर अधिक निर्भरता रहती थी। बड़े हादसों में केंद्रीय एजेंसियों की मदद का इंतजार भी करना पड़ता था। अब प्रदेश में अपनी प्रशिक्षित स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) के साथ आधुनिक कमांड और कंट्रोल व्यवस्था विकसित की गई है।
SDRF ने बढ़ाई प्रदेश की अपनी क्षमता
योगी सरकार के कार्यकाल में SDRF का गठन किया गया, जिसमें अलग-अलग परिस्थितियों में राहत और बचाव के लिए प्रशिक्षित जवानों के साथ मेडिकल और फायर टीमों को भी शामिल किया गया है।
बाढ़, भूकंप, आग, दुर्घटना, इमारत गिरने और अन्य आपदाओं में राज्य की अपनी रेस्क्यू क्षमता बढ़ने का दावा किया गया है। इससे हर बड़ी घटना में केंद्रीय एजेंसियों पर पूरी तरह निर्भर रहने की स्थिति कम हुई है।
200 करोड़ से ज्यादा की लागत से तैयार हाईटेक मुख्यालय
आपदा प्रबंधन को तकनीक से जोड़ने की दिशा में 2026 में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) का नया हाईटेक मुख्यालय तैयार किया गया है। इसे 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है।
यहां 24 घंटे सक्रिय इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर और डिजिटल कमांड-कंट्रोल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके जरिए आपदा की सूचना जुटाने, जिलों से समन्वय, रेस्क्यू टीमों को निर्देश देने और राहत कार्यों की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने का लक्ष्य है।
सांप काटने और डूबने की घटनाओं में भी राहत
आपदा राहत व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में सहायता के दायरे का विस्तार शामिल है। अब बाढ़ के अलावा नदी, तालाब, नाले या गड्ढे में डूबने, सर्पदंश, आकाशीय बिजली, भूकंप, भूस्खलन और मिट्टी धंसने जैसी घटनाओं में भी निर्धारित नियमों के तहत सहायता का प्रावधान किया गया है।
सांड के हमले जैसी घटनाओं को भी राज्य स्तर पर राहत के दायरे में शामिल किए जाने की बात कही गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं से प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद मिलने का रास्ता आसान हुआ है।
मौत पर मुआवजा 1.50 लाख से बढ़कर 4 लाख
आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी बढ़ोतरी की गई है। वर्ष 2010-15 के दौरान जहां मृत्यु पर अनुग्रह राशि करीब 1.50 लाख रुपये थी, वहीं संशोधित SDRF/NDRF मानकों के तहत यह सहायता बढ़कर 4 लाख रुपये तक हो गई है।
पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए सहायता करीब 95,100 रुपये तक पहुंची है। कपड़े और बर्तन के लिए भी सहायता राशि बढ़ाई गई है। गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए भी निर्धारित सहायता में वृद्धि की गई है।
सर्पदंश, डूबने और आकाशीय बिजली जैसी घटनाओं में निर्धारित मानकों के अनुसार अब SDRF से सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
सात दिन में सहायता पहुंचाने का लक्ष्य
सरकार ने आपदा में मृत्यु से जुड़े मामलों में पात्र परिवारों को जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है। इसके लिए भुगतान को सात दिनों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।
खास तौर पर सर्पदंश के मामलों में पहले पोस्टमार्टम और अन्य प्रक्रियाओं के कारण सहायता मिलने में देरी की शिकायतें सामने आती थीं। प्रक्रिया में बदलाव के जरिए पात्र परिवारों को जल्द सहायता देने की व्यवस्था की गई है।
राहत किट में 17 तरह की जरूरी सामग्री
बाढ़ और अन्य आपदाओं के दौरान राहत सामग्री की व्यवस्था को भी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और मानकीकृत करने का दावा किया गया है। वर्तमान में प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली खाद्यान्न किट में 17 तरह की सामग्री शामिल है।
इसमें आटा, चावल, आलू, लाई, चना, अरहर दाल, नमक, हल्दी, मिर्च, धनिया, रिफाइंड तेल, माचिस, मोमबत्ती, बिस्किट समेत अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। पानी को सुरक्षित बनाने के लिए क्लोरीन की गोलियां और नहाने के साबुन भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
महिलाओं के लिए ‘डिग्निटी किट’, पशुओं के चारे की भी व्यवस्था
आपदा के दौरान महिलाओं की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिग्निटी किट की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य राहत शिविरों और प्रभावित इलाकों में महिलाओं की गरिमा और आवश्यकताओं का ध्यान रखना है।
प्रभावित परिवारों के पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था को भी राहत प्रणाली का हिस्सा बनाया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों, मेडिकल टीमों, नाव और मोटरबोट के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने के साथ फॉगिंग और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
राहत से आगे अब तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया पर जोर
उत्तर प्रदेश में आपदा प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था को केवल मुआवजा और राहत वितरण तक सीमित न रखते हुए पूर्व तैयारी, त्वरित बचाव, डिजिटल निगरानी और पुनर्वास से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
सरकार के मुताबिक, SDRF, हाईटेक कमांड सेंटर, विस्तारित राहत व्यवस्था, मानकीकृत राहत किट, महिलाओं के लिए विशेष किट और तेजी से आर्थिक सहायता जैसे कदमों से प्रदेश की आपदा प्रबंधन प्रणाली पहले की तुलना में अधिक संगठित और तकनीक आधारित हुई है।







