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लोकतंत्र की जीत! वोटिंग में नया रिकॉर्ड! केरल- असम में बंपर मतदान, पुडुचेरी की एक सीट पर 94%+ वोटिंग..पुडुचेरी ने रचा इतिहास...

Keralam Assam Puducherry Election Polling Concludes With High Voter Turnout Record: देश में चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस बार मतदान प्रतिशत ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं. केरल और असम में रिकॉर्डतोड़ वोटिंग दर्ज की गई, जिसने लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूती दी है. हालांकि, इन दोनों राज्यों से भी आगे निकलते हुए पुडुचेरी ने सभी को पीछे छोड़ दिया, जहां एक विधानसभा सीट पर 94 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया.
 
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Keralam Assam Puducherry Election Polling Concludes With High Voter Turnout Record: केरलम, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान खत्म हो गया है. केरलम की 140, असम की 126 और पुडुचेरी की 30 सीटों पर वोट डाले गए. इसमें असम में 85.38%, केरलम में 78.03% और पुडुचेरी में 89.83 फीसदी मतदान हुआ. हालांकि, फाइनल आंकड़े आना बाकी है. लेकिन इन सभी बातों क बीच इस बार मतदान प्रतिशत ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं. केरल और असम में रिकॉर्डतोड़ वोटिंग दर्ज की गई, जिसने लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूती दी है. हालांकि, इन दोनों राज्यों से भी आगे निकलते हुए पुडुचेरी ने सभी को पीछे छोड़ दिया, जहां एक विधानसभा सीट पर 94 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया.

असम, केरल और पुडुचेरी में रिकॉर्ड वोटिंग, शांतिपूर्ण चुनाव खत्म, अब नतीजों  का इंतजार | Assam, Kerala aur Puducherry mein record voting, shantipurn  chunav khatam, ab natijon ka intezar

केरल और असम में बंपर वोटिंग

केरल में हमेशा से ही उच्च मतदान प्रतिशत देखने को मिलता रहा है, लेकिन इस बार मतदाताओं का उत्साह पहले से भी ज्यादा नजर आया. सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें दिखीं। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर अपने मताधिकार का प्रयोग किया. वहीं असम में भी हालात कुछ ऐसे ही रहे. ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला. कई क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिसे लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

पुडुचेरी ने बनाया नया रिकॉर्ड

हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा पुडुचेरी की उस विधानसभा सीट की हो रही है, जहां 94% से अधिक मतदान दर्ज किया गया. यह आंकड़ा न सिर्फ मौजूदा चुनावों में, बल्कि हाल के वर्षों में हुए कई चुनावों की तुलना में भी असाधारण माना जा रहा है. स्थानीय मुद्दों, जागरूक मतदाता अभियान और शांतिपूर्ण मतदान व्यवस्था को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है.

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2021 के विधानसभा चुनाव की अपेक्षा असम में इस बार ज्यादा वोटिंग हुई है. पिछले विधानसभा चुनाव में 82.04 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था. इस बार दलगांव में सबसे ज्यादा 94.57 फीसदी मतदान हुआ, जबकि राज्य में सबसे कम मतदान 70.40 फीसदी अमरी में हुआ. असम विधानसभा चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला 4 मई को होगा.

बात करें केरलम की तो यहां भी 2021 के चुनाव की अपेक्षा ज्यादा वोटिंग हुई है. राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव में 74.06 फीसदी वोट पड़े थे. असम और केरलम से ज्यादा वोटिंग (89.83 फीसदी) केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुई है. यहां सुबह सात बजे मतदान शुरू होते ही वोटर्स का उत्साह देखते बन रहा था. ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों में काफी चहल-पहल रही. बड़ी संख्या में बुजुर्ग मतदाता और महिलाएं घर से बाहर निकलीं.

रोबोट ने किया मतदाताओं का स्वागत

यहां चुनाव आयोग की अनूठी पहल भी देखने को मिली. एक पोलिंग स्टेशन में रोबोट को तैनात किया गया, जिसने फूलों से मतदाताओं का स्वागत किया. केंद्र शासित प्रदेश में एनडीए सत्ता बरकरार रखने के लिए चुनावी मैदान में हैं. वहीं विपक्ष सत्ता छीनने की जुगत में. विपक्ष ने अपने प्रचार अभियान में स्थानीय मुद्दों पर खास फोकस किया था. केंद्र शासित प्रदेश में 1 हजार 99 मतदान केंद्र बनाए गए थे.

ईवीएम में कैद हुई उम्मीदवारों की किस्मत

कुल मिलाकर 2 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेश में कुल 1899 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है. इसमें असम में 722 उम्मीदवार, केरलम में 863 और पुडुचेरी में 294 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. असम में बहुमत का आंकड़ा 64 है. पिछले 10 साल से यहां बीजेपी की सरकार है. यहां हिमंत बिस्वा सरमा बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे और सीएम हैं. जबकि गौरव गोगोई अपने पिता की विरासत को बचाने और कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने के लिए सीधी चुनौती दे रहे हैं. राज्य में जलुकबारी, जोरहाट, शिवसागर, नगांव, मरियानी, शिवसागर, दिसपुर, धुबरी, करीमगंज, गुवाहाटी सेंट्रल जैसी सीटें हॉट हैं.

जनता की भागीदारी बनी सबसे बड़ी ताकत

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार उच्च मतदान प्रतिशत के पीछे कई कारण हैं:

  • मतदाताओं में बढ़ती राजनीतिक जागरूकता
  • चुनाव आयोग द्वारा की गई बेहतर व्यवस्थाएं
  • सोशल मीडिया और स्थानीय अभियानों के जरिए मतदाता जागरूकता
  • स्थानीय मुद्दों पर सीधा प्रभाव डालने वाली राजनीति