क्या बदल रहे हैं टीएमसी के सियासी समीकरण? टीएमसी सांसदों की शाह से मुलाकात पर उठे कई सवाल...
Kolkata: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की हालिया बैठक से दूरी बनाने वाले एनसीपीआई (NCPI) के तीन अल्पसंख्यक सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर आयोजित एनडीए की नाश्ता बैठक से पहले हुई। हालांकि मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

कौन हैं ये तीन सांसद?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद सत्ता परिवर्तन के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले 'आसोल तृणमूल' यानी NCPI में शामिल हुए तीन सांसद-
- अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद)
- यूसुफ पठान (बहरमपुर)
- खलीलुर रहमान (जंगीपुर)
हाल ही में दिल्ली में हुई एनडीए की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। उस समय तीनों सांसदों ने स्पष्ट किया था कि वे भाजपा या एनडीए का हिस्सा नहीं हैं।
अमित शाह से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल
एनडीए की बैठक से दूरी बनाने के महज 48 घंटे के भीतर तीनों सांसदों का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। हालांकि इस मुलाकात के बाद भी किसी पक्ष ने यह नहीं बताया कि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई या एनडीए बैठक में अनुपस्थिति का मामला सुलझा या नहीं।
शताब्दी रॉय और असित माल भी रहे मौजूद
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह से मुलाकात के दौरान एनसीपीआई की दो अन्य सांसद शताब्दी रॉय और असित माल भी मौजूद थे। इससे पहले इन तीनों अल्पसंख्यक सांसदों की टीएमसी नेतृत्व के करीबी सांसद सौगत रॉय से मुलाकात की खबरें भी सामने आई थीं, जिसके बाद एनसीपीआई के भीतर मतभेद और संभावित टूट की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
शताब्दी रॉय ने क्या कहा?
मुलाकात के बाद सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि पांचों सांसद गृह मंत्री अमित शाह से मिले और अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों की विभिन्न समस्याओं तथा विकास कार्यों को लेकर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि बैठक का उद्देश्य क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के सामने रखना था।
क्या बदलेंगे राजनीतिक समीकरण?
एनडीए की बैठक में शामिल नहीं होने के बावजूद अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान पहले ही कह चुके हैं कि वे अपने क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर काम करेंगे।
ऐसे में अमित शाह से उनकी मुलाकात को केवल औपचारिक शिष्टाचार बैठक मानने के बजाय राजनीतिक संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि फिलहाल न तो भाजपा और न ही एनसीपीआई की ओर से किसी नए राजनीतिक समीकरण या गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।
आगे क्या?
तीनों सांसदों की इस मुलाकात के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में एनसीपीआई का रुख एनडीए के प्रति बदलता है या यह मुलाकात केवल विकास कार्यों तक ही सीमित रहती है। फिलहाल दोनों पक्षों ने इस पर विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया है.







