CID की पूछताछ में क्या सवाल बना विवाद की वजह? तिलमिलाए सांसद अभिषेक बनर्जी, 14 जून को फिर तलब
West Bengal: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में पश्चिम बंगाल सीआईडी ने गुरुवार को भवानी भवन स्थित मुख्यालय में अभिषेक बनर्जी से करीब 6 घंटे तक कड़ी पूछताछ की। यह पहला मौका है जब बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य की ही किसी जांच एजेंसी के सामने अभिषेक बनर्जी को पेश होना पड़ा है.
अभिषेक बनर्जी ने अस्वस्थता और कानूनी कार्यवाही का हवाला देकर सीआईडी के पिछले तीन समन छोड़ दिए थे. गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस कौशिक चंदा की एकल पीठ ने उन्हें बड़ी राहत देते हुए 3 हफ्तों के लिए गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी, लेकिन साथ ही शाम 6:00 बजे तक सीआईडी के सामने पेश होने का कड़ा निर्देश भी दिया.
दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की बैठक से लौटते ही अभिषेक बनर्जी शाम करीब 5:50 बजे अलीपुर स्थित सीआईडी मुख्यालय भवानी भवन पहुंचे. सीआईडी की विशेष टीम ने उनसे रात करीब 11:30 बजे तक पूछताछ की. बाहर निकलने के बाद वे सीधे पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर गए। सूत्रों के अनुसार, जांच अधिकारी अभिषेक के कई जवाबों से संतुष्ट नहीं दिखे. पूछताछ के दौरान कुछ मौकों पर टीएमसी नेता के उत्तेजित होने की भी खबरें हैं. सीआईडी ने उन्हें 14 जून को दोपहर 12 बजे दोबारा हाजिर होने का निर्देश दिया है.
यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और अन्य महत्वपूर्ण पदों के चयन के लिए सौंपे गए एक आधिकारिक प्रस्ताव से जुड़ा है. टीएमसी नेतृत्व ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र नाथ बोस को 20 मई, 2026 को एक पत्र सौंपा था. इसमें दावा किया गया था कि 6 मई को हुई विधायकों की बैठक में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, आशिमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय को उपनेता और फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक चुनने का सर्वसम्मत प्रस्ताव पास हुआ था.
टीएमसी से निष्कासित बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत दर्ज कराई कि 6 मई को ऐसी कोई बैठक या प्रस्ताव पास ही नहीं हुआ था. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके हस्ताक्षर 19 मई को किसी अन्य रजिस्टर पर लिए गए थे, जिसे बाद में धोखाधड़ी से इस प्रस्ताव में जोड़ दिया गया. कई विधायकों के हस्ताक्षर ब्लॉक अक्षरों में होने के कारण भी उनकी प्रामाणिकता पर सवाल उठे हैं.
सीआईडी इस मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत जांच कर रही है. इसी सिलसिले में पिछले दिनों सीआईडी ने कालीघाट स्थित टीएमसी के केंद्रीय कार्यालय और अभिषेक के कैमैक स्ट्रीट स्थित दफ्तर की तलाशी ली थी, लेकिन मूल रेजोल्यूशन बुक और उपस्थिति रजिस्टर अब तक बरामद नहीं हो सके हैं.
इस कानूनी लड़ाई के बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक नया आंतरिक विस्फोट हो गया है. पार्टी के वरिष्ठ सांसद और देश के दिग्गज वकील कल्याण बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है. कल्याण बनर्जी ने अभिषेक पर घमंड और अस्थिर मानसिकता का आरोप लगाते हुए पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी को अब मेरे जैसे पुराने वफादार नेताओं और अपने भतीजे अभिषेक में से किसी एक को चुनना होगा।"
कल्याण बनर्जी इस मामले में अदालत में अभिषेक का पक्ष रख रहे थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि अभिषेक ने उनकी जानकारी के बिना कालीघाट दफ्तर में हुई सीआईडी छापेमारी के खिलाफ एक अलग रिट याचिका दायर कर दी है तो उन्होंने खुद को अभिषेक के सभी निजी कानूनी मामलों से अलग करने का एलान कर दिया.
अभिषेक बनर्जी की कानूनी मुसीबतें सिर्फ राज्य की सीआईडी तक सीमित नहीं हैं. कथित स्कूल भर्ती घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उन्हें समन जारी कर रखा है. सीआईडी की पूछताछ के ठीक अगले दिन यानी 15 जून को उन्हें कोलकाता में ईडी के सामने भी पेश होना है.







