क्या इसलिए भयावह होती गई दिल्ली अग्निकांड की त्रासदी, होटल जाने से पहले हजार बार सोचेंगे आप...
Delhi Fire: दिल्ली के भीषण अग्निकांड ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. शुरुआती जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से जो तस्वीर सामने आई है, वह बताती है कि आग लगने के बाद हालात कुछ ही मिनटों में बेकाबू हो गए. इमारत में प्रवेश और निकास का मुख्य रास्ता एक ही होने तथा धुएं के तेजी से फैलने के कारण कई लोग बाहर नहीं निकल सके.
कैसे शुरू हुई त्रासदी?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद कुछ ही देर में धुआं पूरे परिसर में फैलने लगा. शुरुआत में लोगों को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं था, लेकिन देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया. घना धुआं गलियारों और सीढ़ियों में भर गया, जिससे लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया.
एक ही रास्ता बना बड़ी समस्या
जांच में यह बात सामने आई है कि इमारत में आने-जाने का प्रमुख रास्ता एक ही था. आग और धुएं ने इसी मार्ग को प्रभावित कर दिया, जिसके बाद अंदर मौजूद लोग फंस गए. विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन निकास (Emergency Exit) और वैकल्पिक रास्तों की उपलब्धता ऐसे हादसों में जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में 39 मरीजों को लाया गया था। जिसमें 18 मृत अवस्था में लाए गए थे. इसमें नौ पुरुष और नौ महिलाएं शामिल थीं जबकि 15 को उपचार के लिए आईसीयू में भर्ती किया गया है. इसमें आठ मरीज वेंटिलेटर पर है जिनकी हालत बेहद गंभीर है. पांच मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया. एक मरीज जो 20 से 25% जला है उसे सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया है. अस्पताल के समूह निदेशक डॉ. संदीप बुद्धिराजा ने बताया कि अस्पताल में मृत लाए लोगों की मौत धुएं की वजह से दम घुटने (एस्फिक्सिया) के कारण हुई है.

आग लगने के बाद धुआं लोगों तक सबसे पहले पहुंचता है जब व्यक्ति धुएं को सांस के साथ अंदर लेता है तो शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से कम होने लगती है. इससे वह बेहोश हो जाता है.
पीवीसी, प्लास्टिक और अन्य सिंथेटिक पदार्थों के जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड, जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं जो फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं. धुएं का अत्यधिक तापमान भी फेफड़ों में थर्मल इंजरी का कारण बनता है. अग्निकांड में जान गंवाने वाले अधिकतर की उम्र 30 से 50 वर्ष के बीच की थी.

आग से घिरी इमारत की तीसरी और चौथी मंजिल पर खड़े लोगों की आंखों में खौफ साफ दिखाई दे रहा था. नीचे झांकते चेहरे मानो जिंदगी और मौत के बीच आखिरी उम्मीद तलाश रहे हों. धुआं कमरों में भरता जा रहा था, बचने की संभावनाएं कम होती देख जान बचाने के लिए जोखिमभरा फैसला लेते हुए छलांग लगा दी.

हादसे के दौरान जान बचाने के लिए जो लोग इमारत की तीसरी मंजिल से कूदे उनमें से कई मरीजों को हाथ-पैर की हड्डियों, लंबी हड्डियों (लॉन्ग बोन) और पेल्विक बोन में फ्रैक्चर हुए हैं. एक मरीज की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई है जिसकी सर्जरी की जा रही है.

भीषण अग्निकांड में गिनी के नागरिक बहत्रिमदिजिउ की जान एक फोन कॉल की वजह से बच गई. वह पिछले दो महीने से इस होटल में ठहरे थे. बुधवार सुबह पिता का फोन आने पर उनसे मिलने अस्पताल चले गए. बाद में उसी होटल में आग लग गई. बहत्रिमदिजिउ ने बताया कि अगर मैं उस समय अस्पताल न गया होता, तो अग्निकांड की चपेट में आ सकता था.

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दिल्ली सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट नीति के तहत फ्लोरिश स्टे बीएंडबी को छह कमरों की अनुमति ही मिली थी, लेकिन वहां 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे.

मुख्य अग्निशमन अधिकारी (दक्षिण क्षेत्र) अभिलाष कुमार मलिक ने बताया कि होटल में प्रवेश और निकास द्वार एक ही होने से लोग होटल में ही फंस गए. इससे त्रासदी भयावह हो गई.
इमारत में एक बेसमेंट, एक भूतल और पांच ऊपरी मंजिलें हैं. लिफ्ट के साथ सिर्फ एक सीढ़ी थी. खिड़कियां बंद होने से इमारत पूरी तरह से सील थी, जिससे हवा आने-जाने या धुएं के निकलने का कोई रास्ता नहीं था.

इमारत की संरचना एक चिमनी की तरह काम कर रही थी, जिससे धुआं और गर्मी तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गई। आग लगने से सेंसर-संचालित गेट बंद हो गए। इससे उसमें फंसे लोगों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा.
होटल में आग के बाद मालिक लवकेश बजाज फरार हो गया था। पुलिस ने लवकेश और उसकी पत्नी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था, ताकि वे विदेश न भाग सकें। उसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें जुटी रहीं। पुलिस ने बताया कि होटल को तीन पार्टनर चला रहे थे। ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट का लाइसेंस जय मिश्रा के नाम पर जारी किया गया था। एक अन्य पार्टनर की पहचान लोकेश बजाज के रूप में हुई है.

फ्लोरिश स्टे बीएंडबी होटल के पास ही मैक्स अस्पताल है. इसलिए होटल में ज्यादातर वही लोग ठहरते थे, जिनके मरीज अस्पताल में इलाज के लिए आते थे. दिल्ली नगर निगम की उच्चस्तरीय जांच शुरू दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है. एमसीडी की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने निगम आयुक्त संजीव खिरवार के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया.

उन्होंने कहा कि भवन की आयु, स्वामित्व, लाइसेंस की स्थिति और अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है. साथ ही क्षेत्र में संचालित अन्य होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी जांच की जाएगी. महापौर प्रवेश वाही ने निगम आयुक्त से तीन दिन में जांच रिपोर्ट तलब की है.

मालवीय नगर में 22 लोगों की मौत के बाद भी तस्वीर नहीं बदली है. एक बार फिर जांच, समीक्षा और कार्रवाई की बातें हो रही हैं. बड़ा सवाल यह है कि यदि पालम के बाद फायर ऑडिट हुआ था तो विवेक विहार कैसे हुआ? और यदि विवेक विहार के बाद व्यवस्था सचमुच चौंकन्नी हुई थी तो मालवीय नगर में 22 लोगों की जान कैसे चली गई? सच यह है कि दिल्ली में हर अग्निकांड के बाद सरकारी बयान नहीं बदलते, सिर्फ मृतकों की संख्या बदल जाती है.

हर बड़े हादसे के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला शब्द है-फायर ऑडिट. सरकार, उपराज्यपाल, मंत्री और अग्निशमन विभाग दावा करते हैं कि संवेदनशील इमारतों की जांच होगी लेकिन आज तक शायद ही किसी एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से बताया हो कि कितनी इमारतों का ऑडिट हुआ, कहां गंभीर खामियां मिलीं, कितनों की एनओसी रद्द हुई और कितनों पर कार्रवाई हुई.

दिल्ली सरकार के गृह मंत्री आशीष सूद इस घटना को लेकर कहा है कि अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध गतिविधियां चल रही हैं और वे हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. नियमों के अनुसार कार्रवाई केवल कागजों में सिमटी हुई है. उन्होंने कहा है कि पूरी दिल्ली में जहां भी ऐसी अवैध गतिविधियां चल रही हैं, वहां तत्काल कार्रवाई होगी.

दिल्ली के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) के शीर्ष संगठन यूनाइटेड रेजिडेंट्स जॉइंट एक्शन (ऊर्जा) ने राजधानी की आवासीय इमारतों में आग से सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की मांग की है. संस्था ने दिल्ली सरकार से संबंधित विभागों के साथ जल्द गोलमेज बैठक बुलाने की अपील की है.
उठ रहे बड़े सवाल
- क्या इमारत में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था थी?
- क्या आपातकालीन निकास की व्यवस्था मौजूद थी?
- आग लगने के बाद अलार्म और सुरक्षा प्रणाली ने काम किया या नहीं?
- क्या सुरक्षा मानकों का नियमित पालन किया जा रहा था?
दिल्ली अग्निकांड ने एक बार फिर शहरी इमारतों में अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं. जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं और रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी.







