क्या तृणमूल कांग्रेस में टूट होगी? किसने कहा- 'ममता अंटार्कटिका में विरोध करें या किसी रेगिस्तान में, कोई फर्क नहीं पड़ेगा'...
Kolkata: पश्चिम बंगाल की राजनीति में गतिशील हालात जारी हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच चुनावों के बाद की टकराव की राजनीति अब नई ऊँचाइयों पर पहुँच रही है. भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी विवादों को लेकर एक विवादित बयान दिया है, जिसमें पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी पर तीखा व्यंग्य किया गया है.

क्या तृणमूल कांग्रेस में टूट होगी ? ये सवाल बार-बार मीडिया में उठा रहा है. दरअसल, टीएमसी के ही एक पूर्व नेता ने ऐसा दावा किया है. उनका कहना है कि टीएमसी के अधिकांश विधायक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ हैं, लिहाजा बहुत संभव है कि प.बंगाल में भी "महाराष्ट्र मॉडल" लागू हो सकता है.
महाराष्ट्र मॉडल का मतलब है कि पार्टी में टूट और बड़ा धड़ा एक अलग गुट के रूप में मान्यता पा सकता है. अब वह सत्ताधारी दल के साथ होंगे या विरोध में रहेंगे, अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है. वैसे, प.बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि किसी भी दागी टीएमसी नेता को भाजपा में शामिल नहीं किया जाएगा.

टीएमसी से निलंबित चल रहे नेता रिजू दत्ता ने कहा, "टीएमसी के दो विधायकों, ऋतब्रता बंदोपाध्याय और संदीपान साहा ने स्पीकर को पत्र लिखकर दावा किया कि उनके हस्ताक्षर जाली हैं. यह सुनकर तृणमूल कांग्रेस ने इन दोनों विधायकों को निष्कासित कर दिया. चूंकि मैंने भी कई वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस में काम किया है, इसलिए मुझे खबर मिली और कुणाल घोष ने भी प्रेस में बताया कि ऋतब्रता बंदोपाध्याय के नेतृत्व में लगभग 50 तृणमूल कांग्रेस विधायक एक होटल में मिले.
उन्होंने फोन पर भी बात की और शाम को विधायक छात्रावास में कई विधायकों के साथ बैठक की. आज वे एकजुट होकर विधानसभा स्पीकर से मिलेंगे और तीन मुख्य मुद्दे उठाएंगे. पहला, हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है. लगभग 50 विधायक हमारे साथ हैं. हम असली तृणमूल कांग्रेस हैं. दूसरा, चूंकि हम असली तृणमूल कांग्रेस हैं, इसलिए विपक्ष के नेता ऋतब्रता बंदोपाध्याय होंगे, न कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय. तीसरा, हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है, इसलिए यह चिन्ह. यह हमारा होना चाहिए. शिवसेना महाराष्ट्र मॉडल फिलहाल बंगाल में लागू है. मैं दो बहुत महत्वपूर्ण बातें कहना चाहता हूं. पहली बात, अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदारी लेनी होगी. जिन लोगों को अभिषेक बनर्जी ने हाथ पकड़कर इस पार्टी में लाया, उन्होंने पार्टी को धोखा दिया है. तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी को भी जिम्मेदारी लेनी होगी, जो मैंने 8 और 9 तारीख को कहा था, आज वे वही बात कह रहे हैं: वे आई-पीएसी से नाराज हैं. वे अभिषेक बनर्जी से नाराज हैं."
रिजु दत्ता कहते हैं, "पार्टी सिर्फ एक पोस्टर बनकर रह जाएगी. दीदी, अभिषेक बनर्जी और उनके कुछ पुराने वफादार दिग्गज विधायक ही बचेंगे. अगर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं का साथ नहीं देगी, तो कार्यकर्ता पार्टी का साथ क्यों देंगे? यह पहला मुद्दा है. दूसरा, दीदी अभिषेक के प्रति पूरी पार्टी के गहरे असंतोष को समझ नहीं पाईं. अब दीदी को इन सभी मुद्दों का समाधान करना होगा."
अब सवाल ये है कि क्या टीएमसी के एमएलए भाजपा के साथ जाएंगे या फिर उन्हें भाजपा का साथ मिलेगा ? पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने इसका सीधा जवाब दिया है. उन्होंने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी टीएमसी के नेताओं को शामिल नहीं करेगी.
उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा ने अपनी ताकत जमीनी स्तर से खड़ी की है और वह "दागी" लोगों को शामिल नहीं करेगी. उन्होंने आगे कहा, "भाजपा का तृणमूलकरण कभी नहीं होगा." भट्टाचार्य ने कहा, "टीएमसी के लिए हमारे दरवाजे बंद हैं. हमने बिना किसी को बाहर से लाए 207 सीटें जीतीं. जनता ने टीएमसी के नेताओं के खिलाफ वोट दिया. इस बार हमारी राजनीतिक रणनीति निचले स्तर से शुरू हुई है. हम दागी लोगों को अपनी पार्टी में कैसे शामिल कर सकते हैं? भाजपा का तृणमूलकरण कभी नहीं होगा."
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आज कोलकाता में हुए विरोध प्रदर्शन पर व्यापक हमला बोलते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि टीएमसी अब खुद के ही खिलाफ हो गई है. उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने पार्टी को नकार दिया है और उनके लिए खेल खत्म हो गया है. उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी को विरोध प्रदर्शन नहीं करने देगी. टीएमसी सड़कों पर उतरकर जनता का सामना करने की स्थिति में नहीं है."
उन्होंने कहा, "पूर्व मुख्यमंत्री के अदालत जाने पर क्या हुआ, यह सभी जानते हैं. अब टीएमसी खुद टीएमसी के खिलाफ है. ममता बनर्जी ध्यान भटकाने के लिए दिल्ली की बात कर रही हैं. वह दिल्ली आ सकती हैं, अंटार्कटिका जा सकती हैं या रेगिस्तान जा सकती हैं. वह कुछ भी कर सकती हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल की जनता ने टीएमसी को नकार दिया है. खेल खत्म हो गया है."
TMC में असंतोष और विधायक निष्कासन
पिछले दिनों तृणमूल कांग्रेस ने दो अपने विधायकों ऋतोब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को “एंटी-पार्टी गतिविधियों” के आरोप में पार्टी से निष्कासित किया है. इस कदम को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और संगठनात्मक गड़बड़ी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
इन दोनों विधायकों ने पार्टी के निर्णयों पर सवाल खड़े किए, विशेषकर एक अहम प्रस्ताव में उनके नामों का बिना मौजूदगी जोड़ा जाना, जिसे उन्होंने “अनियमितता” बताया है. इस मामले से TMC के अंदर विभाजन और खेमेबंदी की चर्चाएँ तेज हुई हैं.







