योगी सरकार का भ्रष्टाचार पर बड़ा एक्शन: 5 जिलों के 12 अफसर-कर्मचारी आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच के घेरे में
UP, Aligarh News: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। सरकारी विभागों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की अवैध संपत्ति पर अब एंटी करप्शन विभाग की पैनी नजर है। अलीगढ़, आगरा, हाथरस, एटा और कासगंज समेत पांच जिलों के 12 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की गोपनीय जांच शुरू की गई है।
भ्रष्टाचार निवारण इकाई (एंटी करप्शन थाना) की टीम इन कर्मचारियों की चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा जुटाने में लगी हुई है। जांच के दायरे में इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, लेखपाल, बाबू, अमीन और सिंचाई विभाग के कर्मचारी तक शामिल हैं। इनमें कई ऐसे कर्मचारी हैं जो पहले रिश्वत लेते हुए पकड़े जा चुके हैं।
जानकारी के अनुसार छह कर्मचारियों के खिलाफ पहले से जांच चल रही थी, जबकि शासन से अनुमति मिलने के बाद छह अन्य कर्मचारियों की संपत्ति की भी जांच शुरू कर दी गई है। इनमें आगरा और हाथरस के तीन कर्मचारियों की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
बता दें कि 21 नवंबर 2022 को अलीगढ़ के छेरत पुलिस लाइन में एंटी करप्शन थाना स्थापित किया गया था। यहां अलीगढ़ मंडल के चारों जिलों में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई होती है। एंटी करप्शन टीम अब तक कई सरकारी कर्मचारियों को रंगे हाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार कर चुकी है। इसके बाद उनकी संपत्तियों की जांच के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाती है और मंजूरी मिलने पर विस्तृत जांच शुरू होती है।
एंटी करप्शन टीम ने गोपनीय तरीके से कई कर्मचारियों की संपत्तियों का रिकॉर्ड जुटा लिया है। हाथरस के एक इंस्पेक्टर, एक सब-इंस्पेक्टर और आगरा के एक लेखपाल की जांच लगभग पूरी मानी जा रही है। वहीं अलीगढ़ के एक सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ चंडौस थाने में मुकदमा भी दर्ज किया जा चुका है।
एंटी करप्शन थाने के इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह ने बताया कि शासन के अनुमोदन के बाद कुल 12 कर्मचारियों की संपत्ति की जांच की जा रही है। जिन मामलों में पर्याप्त साक्ष्य मिल रहे हैं, वहां जल्द ही अग्रिम कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
इधर एंटी करप्शन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगता है तो तुरंत शिकायत करें। विभाग ने इसके लिए हेल्पलाइन नंबर और ई-मेल भी जारी किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।







