योगी सरकार का बड़ा फैसला: दिव्यांग आश्रय गृहों में रहने वालों की अनुदान राशि 50% बढ़ी, अब मिलेंगे ₹3000 प्रति माह
Bihar news: उत्तर प्रदेश सरकार ने मानसिक रूप से दिव्यांग और निराश्रित लोगों के लिए बड़ा राहतभरा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्रों और हाफ-वे होम में रहने वाले संवासियों के भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली मासिक अनुदान राशि को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने का निर्णय लिया है।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि इन संस्थानों में रहने वाले लोग पूरी तरह सरकारी देखभाल पर निर्भर हैं। ऐसे में उन्हें पौष्टिक भोजन, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए अनुदान राशि में वृद्धि जरूरी हो गई थी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जिलों में नियमित रूप से दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित किए जाएं। पात्र लाभार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण समय पर उपलब्ध कराए जाएं।
बैठक में श्रवण बाधित बच्चों के इलाज पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ऐसे बच्चों की जल्द पहचान कर समयबद्ध तरीके से कॉक्लियर इम्प्लांट कराया जाए और ऑपरेशन के बाद उनके पुनर्वास की भी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराना है। उन्होंने सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और चिकित्सकीय पुनर्वास से जुड़ी सभी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की समय पर नियुक्ति के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि नियमित भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। साथ ही सरकारी भवनों को दिव्यांगजन अनुकूल बनाने और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 12.23 लाख से अधिक दिव्यांगजन पेंशन योजना से लाभान्वित हुए। इसी अवधि में 34,420 लाभार्थियों को 43,689 सहायक उपकरण वितरित किए गए, जबकि 226 श्रवण बाधित बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 68 जिलों से 335 बच्चों की पहचान की जा चुकी है।
सरकार ने यह भी बताया कि वर्ष 2017 तक प्रदेश के केवल 10 जिलों में बचपन डे-केयर सेंटर संचालित थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 25 हो गई है। वहीं 28 अन्य जिलों में नए केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। इसी तरह विशेष विद्यालयों की संख्या भी 16 से बढ़कर 28 हो चुकी है, जिससे दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षा और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है।







