योगी बोले- अयोध्या का वैभव कुछ लोगों को नहीं हो रहा बर्दाश्त, सनातनियों को ‘कालनेमियों’ से रहना होगा सावधान
UP News: मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में अयोध्या, काशी और सनातन परंपरा को लेकर अपने विचार रखे। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के बाद कुछ लोग इसके वैभव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और भ्रम फैलाने का प्रयास करेंगे।
योगी आदित्यनाथ ने रामभक्तों और सनातन धर्मावलंबियों से ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने अपने संबोधन में ऐसे विरोधियों के लिए ‘कालनेमि’ का संदर्भ दिया और कहा कि किसी को यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि देश गलत दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अयोध्या से काशी तक धार्मिक स्थलों का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अयोध्या के राम मंदिर के साथ काशी विश्वनाथ धाम, विंध्याचल धाम, प्रयागराज के कुंभ और वृंदावन के वैष्णव कुंभ का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इन धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों तथा स्थलों के विकास को देखकर सनातन परंपरा से जुड़े लोगों के बीच भ्रम पैदा करने के प्रयास हो सकते हैं। योगी ने सनातन धर्मावलंबियों से ऐसे दुष्प्रचार के प्रति जागरूक रहने की बात कही।
हनुमान और कालनेमि का प्रसंग सुनाया
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने रामायण के कालखंड में आए कालनेमि के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे, तब कालनेमि ने उन्हें रोकने के लिए छद्म रूप अपनाया था।
योगी ने इसी प्रसंग को वर्तमान समय से जोड़ते हुए कहा कि रामभक्तों और सनातन धर्मावलंबियों को भी ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है, जो उनके मुताबिक भ्रम और दुष्प्रचार फैलाने का प्रयास कर सकते हैं।
‘एक भाव, एक स्वर और एक गति से आगे बढ़ना होगा’
गोरक्षपीठ की भूमिका पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पीठ किसी एक पंथ, संप्रदाय या जाति तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार गोरक्षपीठ संपूर्ण सनातन परंपरा के लिए समर्पित है और यहां अलग-अलग उपासना पद्धतियों को मानने वाले लोगों के साथ समान व्यवहार किया जाता है।
उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी पंथों और संप्रदायों को एक साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। योगी ने कहा कि देश की बड़ी आबादी में एक साथ आगे बढ़ने की क्षमता मजबूत होगी तो भारत की सामूहिक शक्ति भी बढ़ेगी।
महंत दिग्विजयनाथ के शिक्षा क्षेत्र में योगदान को याद किया
श्रद्धांजलि सभा में योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के सामाजिक और शैक्षणिक योगदान को भी याद किया।
उन्होंने कहा कि करीब 95 वर्ष पहले, जब देश स्वतंत्र नहीं था और संसाधनों की कमी थी, तब महंत दिग्विजयनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी। परिषद का नामकरण महाराणा प्रताप के नाम पर किया गया, जिन्हें स्वदेश, स्वधर्म और स्वाभिमान के आदर्श से जोड़ा जाता है।
गोरखपुर में शिक्षा के विस्तार का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना के समय शिक्षा परिषद से जुड़े संस्थानों ने भी आधार तैयार करने में भूमिका निभाई। उन्होंने महंत दिग्विजयनाथ के उस विचार का उल्लेख किया कि गोरक्षपीठ की संपत्ति का इस्तेमाल लोककल्याण के कार्यों में होना चाहिए।
योगी ने संतों और महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही। उनके मुताबिक महापुरुष केवल अपने समय की परिस्थितियों तक सीमित होकर नहीं सोचते, बल्कि उनके कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आधार तैयार करते हैं।
प्रयागराज कुंभ और वृंदावन वैष्णव कुंभ का भी जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने 2019 के प्रयागराज कुंभ के बाद वृंदावन में आयोजित वैष्णव कुंभ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के जरिए धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के बड़े आयोजनों की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास हुआ।
गोरखनाथ मंदिर में दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर कई दिनों से धार्मिक और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।







