पोस्ट-पोल हिंसा को लेकर ममता बनर्जी की हाईकोर्ट में याचिका, हाईकोर्ट से जांच और FIR दर्ज करने की मांग
Kolkata: पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा को लेकर सियासत और कानूनी लड़ाई तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए संबंधित घटनाओं में FIR दर्ज करने और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है. सुबह करीब 11 बजे कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी ने पोस्ट-पोल वायलेंस से जुड़े मामले में अपनी बात रखने के लिए अदालत का रुख किया.

बताया जा रहा है कि याचिका में चुनाव के बाद विभिन्न जिलों में सामने आई हिंसा, तोड़फोड़, मारपीट और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमलों की घटनाओं का उल्लेख किया गया है. ममता बनर्जी की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया है कि पुलिस को तत्काल FIR दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं.
क्या है मामला?
दरअसल 4 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद राज्य में कथित हिंसा को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई थी. इसी पर हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है, जिसमें ममता बनर्जी खुद पक्ष रखने पहुंचीं.
ममता बनर्जी की अदालत में दलील
ममता बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि पुलिस की मौजूदगी में ही हिंसा, आगजनी और हत्या की घटनाएं हो रही हैं. राज्य को 'बुलडोजर स्टेट' नहीं बनने देना चाहिए. कोर्ट पुलिस को निर्देश दे कि सभी पोस्ट-पोल हिंसा मामलों में FIR दर्ज की जाए.
TMC का पक्ष: ‘हूलिगनिज़्म के नाम पर फैलाई जा रही अराजकता'
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि पोस्ट-पोल हिंसा के नाम पर राज्य में अराजकता फैलाई जा रही है. कई जगहों पर गंभीर हंगामा और अशांति देखने को मिल रही है. TMC कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है. फिलहाल कई कार्यकर्ता अपने घरों पर नहीं रह पा रहे हैं.
बुलडोजर कार्रवाई का भी उठा मुद्दा
याचिकाकर्ता पक्ष के वकील विकास भट्टाचार्य ने कोर्ट का ध्यान कोलकाता के हॉग मार्केट (न्यू मार्केट) की घटना की ओर दिलाया. 4 मई की रात कथित तौर पर अस्थायी दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया. आरोप लगाया गया कि मुस्लिम दुकानदारों को निशाना बनाया गया.
इस पर कल्याण बनर्जी ने भी कहा कि बुलडोजर कार्रवाई अवैध थी. करीब 400 साल पुराने ढांचे का हिस्सा तोड़ा गया.
अब आगे क्या
हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी है और अदालत के निर्देशों पर सभी की नजर है. यह मामला बंगाल की सियासत और कानून-व्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.







