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सुदीप बंद्योपाध्याय और अमित शाह से मीटिंग के बाद पूर्व मंत्री ने दिया TMC से इस्तीफा, क्या खत्म हो जाएगी ममता की तृणमूल?

 
सुदीप बंद्योपाध्याय और अमित शाह से मीटिंग के बाद पूर्व मंत्री ने दिया TMC से इस्तीफा, क्या खत्म हो जाएगी ममता की तृणमूल?
Newshaat Desk: तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने शनिवार (13 जून) को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. यह मुलाकात केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बातचीत के बाद हुई. बंद्योपाध्याय जब मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित यादव के आवास पर गए तो उनके साथ तृणमूल की बागी सांसद शताब्दी रॉय भी थीं. 

बंद्योपाध्याय और शाह की मुलाकात के चंद घंटों बाद पूर्व मंत्री मानस भुनिया ने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया. 74 वर्षीय भुनिया ने NDTV से बातचीत में कहा कि वो पार्टी में चल रहे संकट से नाखुश हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि उनका अगला कदम क्या होगा. 77 साल के सुदीप बंद्योपाध्याय 6 बार से लोकसभा सांसद हैं. वह पश्चिम बंगाल की कोलकाता उत्तर सीट से सांसद हैं और लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता हैं.

भूपेंद्र यादव संग बंद्योपाध्याय की मुलाकात पर टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने कहा, "ममता दीदी ने इन लोगों को पद और सम्मान दिया और बदले में ये लोग ऐसा कर रहे हैं. सुदीप बंद्योपाध्याय का पार्टियां बदलने का इतिहास रहा है. हमने कहा था कि वह ठीक नहीं हैं और उनकी राजनीति सिर्फ ममता दीदी को गुमराह करके चलती थी. इस बात के लिए मुझे एक बार पार्टी से सस्पेंड भी किया गया था. आज यह साबित हो रहा है कि उस दिन मैंने जो कहा था, वह सही था."

विधायक कुणाल घोष ने आगे कहा कि बंद्योपाध्याय के "सत्ता और पद की लालसा" के कारण ही तृणमूल ने कई अहम नेताओं को बीजेपी के हाथों गंवा दिया. तपस रॉय और सजल घोष जैसे काबिल नेताओं ने पार्टी इसलिए छोड़ी क्योंकि सुदीप दा को अपनी कुर्सी जाने का डर था और उन्हें पार्टी में पावर और पद का लालच था. मुझे पहले भी उनके खिलाफ और तपस दा जैसे सीनियर नेताओं के पक्ष में बोलने की वजह से पार्टी से सस्पेंड किया गया था. अब लीडरशिप को समझ आ जाना चाहिए कि उन्होंने पहले किस तरह के इंसान का साथ दिया था."

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित घर पर तृणमूल ऑफिस में पार्टी नेताओं की बैठक के बाद विधायक कुणाल घोष ने सवाल उठाया कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री के साथ कोलकाता उत्तर के सांसद का ऐसा बर्ताव सही है, जबकि उन्होंने ही उन पर बहुत भरोसा और सम्मान जताया.