कामकाज ठप होने से नाराज सरकार, हड़ताली राजस्व कर्मियों पर नो वर्क-नो पे से लेकर निलंबन तक की तैयारी
Bihar: बिहार में एक बार फिर हड़ताल पर गए राजस्व कर्मियों पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. विभागीय कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करने के आरोप में भोजपुर जिला पदाधिकारी तनय सुल्तानिया ने पांच राजस्व कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई विभागीय निर्देशों के आलोक में हड़ताल के जरिए सामूहिक अवकाश पर रहने के कारण की गई है.

सूत्रों के अनुसार, राजस्व कर्मियों द्वारा कामकाज ठप कर हड़ताल पर जाने से भूमि नापी, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन, प्रमाण पत्र निर्गमन और अन्य महत्वपूर्ण राजस्व कार्य प्रभावित हुए हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हड़ताल में शामिल कर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
सरकार का कहना है कि आम जनता से जुड़े कार्यों को बाधित करना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर असहमति रखते हैं तो उसके लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया मौजूद है, लेकिन हड़ताल को सरकार अनुशासनहीनता मान रही है।
क्या-क्या हो सकती है कार्रवाई
राज्य सरकारी सेवक नियमावली के तहत हड़ताल पर गए कर्मियों पर कई तरह की कार्रवाई संभव है, जिनमें—
- वेतन कटौती (नो वर्क, नो पे)
- कारण बताओ नोटिस
- विभागीय जांच
- प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry)
- गंभीर मामलों में निलंबन तक की कार्रवाई
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, पहले भी ऐसे मामलों में कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगाई जा चुकी है और इस बार सरकार और सख्त कदम उठा सकती है।
राजस्व सेवाएं प्रभावित, जनता परेशान
हड़ताल के कारण राज्य के कई जिलों में राजस्व कार्यालयों में कामकाज ठप रहा। जमीन से जुड़े मामलों को लेकर लोग कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें निराश लौटना पड़ा। खासकर ग्रामीण इलाकों में प्रमाण पत्र और भूमि विवाद से जुड़े मामलों में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कर्मचारी संगठनों का पक्ष
राजस्व कर्मियों के संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। उनका दावा है कि कार्यभार बढ़ने, संसाधनों की कमी और लंबित मांगों के कारण वे आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं। हालांकि सरकार ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा है कि बातचीत के रास्ते खुले हैं, लेकिन हड़ताल का तरीका गलत है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब राजस्व कर्मियों की हड़ताल पर सरकार ने कार्रवाई की हो। इससे पहले भी ऐसे आंदोलनों के दौरान कई कर्मचारियों का वेतन रोका गया था और अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी। सरकार के इस रुख से साफ है कि वह प्रशासनिक अनुशासन के मामले में कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
सरकार की दो टूक
राज्य सरकार ने दो टूक कहा है कि जनता के काम से जुड़ी सेवाएं बाधित करना सेवा शर्तों का उल्लंघन है और इसमें शामिल कर्मियों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कार्रवाई की सूची और लंबी हो सकती है।
फिलहाल, बिहार में राजस्व कर्मियों की हड़ताल और उस पर सरकार की सख्ती राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई है







