राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने दी श्रद्धांजलि, बताया राष्ट्रीय चेतना का प्रणेता
Remembering Maithili Sharan Gupt: डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि गुप्त जी की रचनाओं ने न केवल हिंदी साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और एकता की भावना जगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी साहित्यिक कृतियां आज भी भारतीय समाज और संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं
Patna: बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक हिंदी साहित्य के ऐसे महान साहित्यकार थे, जिन्होंने अपनी ओजस्वी और संवेदनशील लेखनी के माध्यम से देश में राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक गौरव और स्वाभिमान की भावना को मजबूत किया.
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि गुप्त जी की रचनाओं ने न केवल हिंदी साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और एकता की भावना जगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी साहित्यिक कृतियां आज भी भारतीय समाज और संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं.
उन्होंने कहा कि 'साकेत', 'यशोधरा', 'भारत-भारती' और 'किसान' जैसी अमर कृतियों ने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी और स्वतंत्रता आंदोलन के समय जनमानस को जागृत करने में ऐतिहासिक योगदान दिया. इन रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रकवि ने भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता का प्रभावशाली संदेश दिया.


विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त के विचार और उनका कृतित्व आज भी समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं. उनकी रचनाएं नई पीढ़ी को राष्ट्रसेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती रहेंगी.
उन्होंने राष्ट्रकवि के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन और लेखन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा.







