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बिहार की सियासत में बड़ा संकेत: निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाने पर जदयू विधायकों की सहमति, जल्द मिल सकती है नई जिम्मेदारी

    •    सीएम Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच बड़ा राजनीतिक संदेश
    •    पहले एमएलसी, फिर डिप्टी सीएम… जदयू की रणनीति पर तेज हुई चर्चा
 
बिहार की सियासत में बड़ा संकेत: निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाने पर जदयू विधायकों की सहमति, जल्द मिल सकती है नई जिम्मेदारी
Bihar political news: बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच अब उनके बेटे निशांत कुमार को लेकर भी बड़ा राजनीतिक संकेत सामने आया है।

सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में हुई Janata Dal (United) की विधायकों की बैठक में निशांत कुमार को राज्य की राजनीति में अहम भूमिका देने पर सहमति बनी है। बैठक में मौजूद विधायकों ने सर्वसम्मति से उन्हें डिप्टी सीएम बनाने के प्रस्ताव का समर्थन किया।

पहले एमएलसी बनने की तैयारी

जानकारी के अनुसार, सरकार में बड़ी जिम्मेदारी देने से पहले निशांत कुमार को विधानमंडल का सदस्य बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है। इसके तहत उन्हें अप्रैल में Bihar Legislative Council का सदस्य यानी एमएलसी बनाया जा सकता है।

इसके बाद जून में होने वाले विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव में भी उनकी उम्मीदवारी लगभग तय मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम उन्हें सक्रिय राजनीति में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार में हो सकता है बड़ा फेरबदल

सूत्र यह भी बता रहे हैं कि राज्य सरकार में जल्द ही बड़े स्तर पर विभागों का फेरबदल हो सकता है। चर्चा है कि JDU गृह मंत्रालय को वापस अपने पास लेने की कोशिश कर सकती है, जो फिलहाल सहयोगी दल BJP के पास है।

सत्ता संतुलन को ध्यान में रखते हुए विभागों के बंटवारे में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है।

भविष्य के नेतृत्व की तैयारी?

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पार्टी के भीतर निशांत कुमार को भविष्य के नेतृत्व के तौर पर तैयार किया जा रहा है। जदयू की बैठक में उनके नाम पर बनी सहमति को इसी दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है।

संवैधानिक प्रक्रिया जरूरी

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को मंत्री या उपमुख्यमंत्री बनने के लिए विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होना जरूरी होता है। यही वजह है कि पहले उन्हें एमएलसी बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

हालांकि, इन सभी संभावनाओं को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे बिहार की सियासत में संभावित बड़े बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।