बिहार की सियासत में बड़ा ट्विस्ट! नीतीश के साथ दिखेंगे तेजस्वी, तो विजय सिन्हा के साथ खड़े होंगे तेज प्रताप-एक मंच दो भाई, जानिए क्या है पूरा मामला…
Bihar political update: राष्ट्रीय जनता दल से अलग किए जाने के बाद तेज प्रताप यादव अब अपनी सियासी पहचान नए सिरे से गढ़ने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में वे बिहार की राजनीति का अब तक का सबसे बड़ा सामाजिक–राजनीतिक जुटान तैयार करने की कवायद में हैं। मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित होने वाले चूड़ा–दही भोज के बहाने तेज प्रताप ऐसा मंच सजा रहे हैं, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दोनों के एक साथ दिखने की पूरी संभावना है।

तेज प्रताप की यह पहल इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में उन्हें पार्टी और परिवार से अलग कर दिया गया है। इसके बावजूद वे लालू यादव की राजनीतिक और सामाजिक परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दे रहे हैं।
विजय सिन्हा से मुलाकात, सियासी संकेत साफ
इसी सिलसिले में तेज प्रताप यादव ने बुधवार को बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा से मुलाकात कर उन्हें मकर संक्रांति भोज का औपचारिक निमंत्रण दिया। तेज प्रताप ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य सभी बड़े राजनीतिक चेहरों को एक मंच पर लाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी आमंत्रण भेजा जा रहा है और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी निमंत्रण देने की तैयारी है।
अगर यह आयोजन तय रूप में होता है, तो बिहार की राजनीति में यह एक दुर्लभ दृश्य होगा, जब नीतीश और तेजस्वी एक ही मंच पर नजर आएंगे।
परंपरा के सहारे सियासत
बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के मौके पर चूड़ा–दही भोज की परंपरा दशकों पुरानी है। लालू प्रसाद यादव इसे सामाजिक समरसता और राजनीतिक मेलजोल का प्रतीक बनाते रहे हैं। अब उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए तेज प्रताप यादव इस आयोजन के जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि वे सियासत से बाहर नहीं हुए हैं।
तेज प्रताप का कहना है कि यह पूरी तरह सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन है, जिसमें चूड़ा, दही, गुड़ और तिलकुट के साथ मकर संक्रांति की परंपरा निभाई जाएगी। आयोजन सभी वर्गों और दलों के लिए खुला रहेगा।
नए सियासी समीकरणों की आहट
हालांकि इस भोज के सियासी मायने भी गहरे माने जा रहे हैं। तेज प्रताप और तेजस्वी यादव के रिश्तों में आई दरार, और दूसरी ओर एनडीए नेताओं से बढ़ती नजदीकियों की चर्चा—इन सबके बीच यह आयोजन कई संकेत दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह भोज केवल परंपरा नहीं, बल्कि तेज प्रताप का शक्ति प्रदर्शन और संभावित नए राजनीतिक समीकरणों की झलक भी हो सकता है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मकर संक्रांति के इस मंच पर वाकई बिहार की सियासत के बड़े चेहरे एक साथ नजर आएंगे, या फिर यह आयोजन केवल संदेशों तक ही सीमित रह जाएगा।







