Bihar Assembly Elections 2025: सीट बंटवारे पर एनडीए में खींचतान, चिराग पासवान ने बढ़ाई भाजपा की टेंशन
Bihar chunav 2025: बिहार में कुछ ही दिनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और राजनीतिक माहौल अपने चरम पर है। मुकाबला इस बार भी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए और राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के बीच माना जा रहा है। लेकिन चुनाव से पहले ही एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर घमासान तेज़ हो गया है।
चिराग पासवान की सीटों की मांग
एनडीए के अहम सहयोगी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के लिए 40 सीटों की मांग रख दी है। वहीं भाजपा की ओर से फिलहाल अधिकतम 25 सीटों का ऑफर दिया गया है। इस वजह से एनडीए के भीतर तनातनी खुलकर सामने आ गई है।
पिछली जीत से बढ़ा हौसला
लोकसभा चुनाव 2024 में बिहार की पांचों सीटों पर शानदार जीत दर्ज करने के बाद चिराग पासवान इस बार विधानसभा में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं। वे लगातार नीतीश कुमार सरकार और राज्य की कानून-व्यवस्था पर निशाना साध रहे हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि चिराग अब खुद को सिर्फ दिल्ली की राजनीति तक सीमित नहीं रखना चाहते।
जनता से सीधा जुड़ाव
‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ अभियान और ‘चिराग का चौपाल’ जैसे जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए वे खुद को ज़मीनी नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं। भले ही उन्होंने अभी तक मुख्यमंत्री पद की इच्छा का खुलकर इज़हार नहीं किया, लेकिन उनके तेवर बताते हैं कि वे भविष्य में शीर्ष पद की दौड़ में शामिल हो सकते हैं।
भाजपा के लिए मुश्किल समीकरण
भाजपा के सामने मुश्किल स्थिति है।
• अगर वह चिराग की मांग मानती है, तो जदयू जैसे सहयोगी दलों की नाराज़गी झेलनी पड़ सकती है।
• और अगर उन्हें नज़रअंदाज़ किया गया, तो चिराग अकेले चुनाव लड़ सकते हैं, जिससे एनडीए को बड़ा नुकसान हो सकता है।
गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में लोजपा ने अकेले चुनाव लड़ते हुए 5.6% वोट हासिल किए थे और कई सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों की हार का कारण बने थे।
आने वाले दिन होंगे निर्णायक
अब सवाल यह है कि भाजपा चिराग पासवान को कितना मनाती है और एनडीए की एकता को बचाने के लिए क्या रणनीति अपनाती है। बिहार की चुनावी राजनीति में आने वाले कुछ दिन बेहद अहम साबित होने वाले हैं।







