बिहार बजट 2026-27: 3.47 लाख करोड़ का ऐतिहासिक बजट, सुशील मोदी के योगदान की गूंज
11 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड
बिहार के वित्तीय इतिहास में सुशील कुमार मोदी का नाम खास जगह रखता है। उन्होंने राज्य में 11 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाया। वर्ष 2005 से 2020 के बीच जब-जब बिहार में एनडीए की सरकार रही, तब वित्त विभाग की जिम्मेदारी अधिकतर उन्हीं के पास रही। उन्होंने पहली बार 2006 में बजट पेश किया और 2013 तक लगातार आठ बार बजट सदन में रखा।
‘हरित बजट’ से बनाई अलग पहचान
सुशील मोदी केवल बजट की राशि बढ़ाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि नए प्रयोगों के लिए भी जाने जाते हैं। उनके कार्यकाल में देश का पहला ‘हरित बजट’ पेश किया गया। माना जाता है कि लालू-राबड़ी शासन के बाद बिहार की कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालने और उसे पटरी पर लाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। उन्होंने वित्तीय अनुशासन पर जोर देकर बजट व्यवस्था को मजबूत किया।
नीतीश सरकार की योजनाओं को मिला सहारा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कई बड़ी योजनाएं, जैसे ‘सात निश्चय’, मजबूत वित्तीय व्यवस्था के बिना संभव नहीं थीं। सुशील मोदी ने इन योजनाओं के लिए ठोस आर्थिक ढांचा तैयार किया। 2017 में एनडीए में वापसी के बाद उन्होंने फिर से उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री की जिम्मेदारी संभाली और 2020 तक तीन और बजट पेश किए।
2005 से 2026 तक बजट का लंबा सफर
आज का ₹3.47 लाख करोड़ का बजट इस बात का संकेत है कि बिहार की अर्थव्यवस्था अब बड़े स्तर पर आगे बढ़ रही है। 2005-06 में जहां बजट का आकार काफी छोटा था, वहीं सुशील मोदी द्वारा रखी गई मजबूत नींव पर आज बिहार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन बिहार के हर बजट में उनके योगदान की झलक साफ दिखाई देती है।







